हिमाचल में 2,035 सरकारी संस्थान डिनोटिफाई, 362 नए खुले; विधानसभा में जयराम ठाकुर और सुक्खू आमने-सामने

HIGHLIGHTS
- सदन में संस्थानों को डिनोटिफाई करने के साथ उन्हें दोबारा खोलने का मुद्दा भी उठा।
- सरकार के अनुसार मौजूदा कार्यकाल में 362 संस्थान खोले गए हैं।
- डिनोटिफाई किए गए 123 संस्थानों को फिर से शुरू किए जाने की जानकारी दी गई।
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के आठवें दिन सदन में संस्थानों को बंद करने, विलय करने और डिनोटिफाई करने का मुद्दा एक बार फिर उठा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के अलावा भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल और रणधीर शर्मा ने इस संबंध में सवाल किए। जयराम ठाकुर ने कहा कि साढ़े तीन साल बाद सवाल का जवाब मिला है और वह भी पूरा नहीं है।
सरकार की ओर से बताया गया कि मौजूदा कार्यकाल में अब तक 2,035 संस्थानों को डिनोटिफाई किया गया है, यानी उन्हें बंद किया गया है। वहीं, 362 संस्थान खोले गए हैं और 123 डिनोटिफाई किए गए संस्थान दोबारा खोले गए हैं।
जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि आखिर इन संस्थानों को बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने पूछा कि क्या पहले खोले गए संस्थान गलत थे। उनका कहना था कि चार साल का कार्यकाल पूरा होने को है, फिर भी जरूरत के हिसाब से संस्थान बंद किए जा रहे हैं।
राजनीतिक आधार पर संस्थान खोलने का आरोप
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जवाब देते हुए कहा कि इसका उत्तर अब इसलिए आया है ताकि विपक्ष के पास राजनीतिक हथियार हो। उन्होंने कहा कि संस्थान जनता की जरूरत के अनुसार खोले या बंद किए जाते हैं। सरकार भाजपा और कांग्रेस को देखकर संस्थानों को खोलने या बंद करने का फैसला नहीं करती।
सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने राजनीतिक आधार पर संस्थान खोले थे।
700 शैक्षणिक संस्थानों में नहीं था पर्याप्त स्टाफ
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने 5 हजार करोड़ रुपये की रेवड़ियां बांटीं। उनके कार्यकाल में 700 ऐसे शैक्षणिक संस्थान खोले गए, जहां शिक्षक नहीं थे। पूरा स्टाफ और आधारभूत ढांचा भी उपलब्ध नहीं था।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक की नियुक्ति कर स्कूलों को अपग्रेड कर दिया गया। इसी वजह से ऐसे संस्थानों को बंद करने का फैसला लिया गया और अब जरूरत के आधार पर संस्थान खोलने के लिए पैरामीटर तय किए गए हैं। सरकार के अनुसार, खोले गए संस्थान नीड बेस्ड हैं। स्वास्थ्य संस्थानों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है और इन्हें जरूरत के अनुसार खोला जाएगा।
राजनीतिक लाभ के लिए फैसले लेने का आरोप
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि उपलब्ध आंकड़े 31 जुलाई 2025 तक के हैं और सरकार को 31 जुलाई 2026 तक का आंकड़ा देना चाहिए।
उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान जलशक्ति विभाग का डिवीजन खोला गया था। वहां स्टाफ के साथ सभी सुविधाएं उपलब्ध थीं, लेकिन कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद इसे बंद कर दिया गया।
रणधीर शर्मा ने कहा कि तीन साल बाद मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान कुछ किलोमीटर की दूरी पर फिर से डिवीजन खोल दिया गया। हालांकि, इस बार स्टाफ पहले से भी कम है और भवन भी किराये का है। उन्होंने सवाल किया कि यह किस तरह नीड बेस्ड निर्णय है और तीन साल बाद फिर जरूरत कैसे पैदा हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए फैसले ले रही है।
‘तीन साल में सरकार को नीड ही पता नहीं चली’
भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने सदन में कहा कि तीन साल के कार्यकाल में सरकार को अब तक यह पता नहीं चल पाया कि जरूरत कहां है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक मकसद से संस्थानों को बंद और खोला जा रहा है।
जयराम ठाकुर बोले- राजनीतिक मकसद से बंद किए संस्थान
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने राजनीतिक उद्देश्य से संस्थानों को बंद किया है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले को तमाशा बना रही है और बदले की भावना से संस्थान बंद किए गए।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने जनता और जनप्रतिनिधियों की मांग के आधार पर संस्थान खोले थे। जयराम ठाकुर ने पूछा कि क्या सरकार अपने सभी फैसलों की समीक्षा करेगी।
‘कुछ संस्थान बाद में खोले जाएंगे’
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि संस्थान किसी व्यक्ति की इच्छा के आधार पर नहीं खोले या बंद किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ संस्थान जनगणना खत्म होने के बाद खोले जाएंगे।
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