लखनऊ में बाढ़ का असर: नवरात्र पर मां चंद्रिका देवी मंदिर में दर्शन नहीं कर सकेंगे भक्त

HIGHLIGHTS
- मंदिर परिसर के बाहर पुलिस, महिला पुलिस और पीएसी तैनात।
- समिति ने घरों में घट स्थापना कर पूजा करने की अपील की।
- अमावस्या पर दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को लौटाया गया।
लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र के कठवारा गांव स्थित मां चंद्रिका देवी मंदिर में इस बार शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालु दर्शन नहीं कर सकेंगे। गोमती नदी की बाढ़ का पानी मंदिर के चारों ओर भरा होने के कारण मंदिर को भक्तों के लिए बंद रखने का फैसला लिया गया है। शनिवार को अमावस्या पर दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को मुख्य गेट से ही वापस लौटना पड़ा। सुरक्षा के लिए मंदिर परिसर के बाहर पुलिस, महिला पुलिस और पीएसी के जवान तैनात किए गए हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए फैसला
मां चंद्रिका देवी मेला विकास समिति और पुलिस प्रशासन की संयुक्त बैठक शुक्रवार को खाटू श्याम मंदिर परिसर में हुई। बैठक में बाढ़ की स्थिति, मंदिर तक पहुंचने वाले रास्तों और दुकानदारों की समस्याओं पर चर्चा की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नवरात्र के दौरान मंदिर बंद रखने का निर्णय लिया गया।
समिति के अध्यक्ष अखिलेश सिंह चौहान और महामंत्री अनुराग तिवारी ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे शारदीय नवरात्र में अपने घरों पर ही घट स्थापना कर पूजा-अर्चना करें। उन्होंने कहा कि यदि बाढ़ का पानी कम होता है और मंदिर तक पहुंचने के रास्ते सुरक्षित हो जाते हैं, तो समिति और प्रशासन स्थिति की समीक्षा कर आगे का फैसला लेंगे।
अमावस्या पर दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु लौटे
शनिवार को अमावस्या के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन करने मंदिर पहुंचे। हालांकि, मुख्य गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। श्रद्धालुओं को बताया गया कि मंदिर के आसपास जलभराव है और वहां तक पहुंचना खतरनाक हो सकता है। इसके बावजूद दर्शन के लिए लोगों के मंदिर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
मंदिर में नियमित पूजा और आरती जारी
श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक के बावजूद मंदिर में पुजारियों द्वारा निर्धारित समय और परंपरा के अनुसार मां का शृंगार, पूजन और आरती की जा रही है। मंदिर के मुख्य गेट से लेकर खाटू श्याम मंदिर और चंदनकुंड गांव तक मेले की दुकानें भी लगी हुई हैं।
फिलहाल बाढ़ का पानी उतरने और रास्तों के सुरक्षित होने का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं को जलभराव वाले खतरनाक रास्तों पर जाने से रोकना है। स्थिति में सुधार होने के बाद ही मंदिर में दर्शन दोबारा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा।





















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