जेएनयू: पुलिस और छात्रों के बीच हिंसक झड़प, 25 से अधिक पुलिसकर्मी घायल

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में गुरुवार को छात्रसंघ द्वारा कुलगुरु के विरोध में शिक्षा मंत्रालय तक ‘लांग मार्च’ निकालने की घोषणा के बाद परिसर के बाहर हालात तनावपूर्ण हो गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि कैंपस के बाहर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है और मार्च को विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित रखा जाए।
इसके बावजूद दोपहर बाद बड़ी संख्या में छात्र मुख्य द्वार की ओर बढ़ने लगे। गेट पर पहले से तैनात पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई। छात्रों ने पुलिस पर बल प्रयोग का आरोप लगाया, जबकि पुलिस का कहना है कि कई जवान भी इस दौरान घायल हुए। थाना किशनगढ़ के एसएचओ समेत कुछ पुलिसकर्मियों को उपचार के लिए Safdarjung Hospital ले जाया गया।
बैरिकेड हटाने की कोशिश, कई छात्र हिरासत में
छात्रसंघ पदाधिकारियों—अदिति मिश्रा, गोपिका के बाबू, सुनील यादव, दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार—ने समर्थकों के साथ बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने का प्रयास किया। जैसे ही प्रदर्शनकारी मुख्य द्वार पार करने लगे, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई छात्रों को हिरासत में ले लिया। अब तक करीब 50 छात्रों को हिरासत में लेने की पुष्टि हुई है।
दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल के अनुसार, बिना अनुमति लगभग 500 छात्र दोपहर 3:20 बजे गेट से बाहर निकलकर मार्च करने लगे। पुलिस का दावा है कि बैरिकेड को नुकसान पहुंचाया गया और कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैनर व अन्य वस्तुएं फेंकी। धक्का-मुक्की की घटनाओं की भी जांच की जा रही है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई गई है।
छात्रसंघ का पक्ष
छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा का कहना है कि मार्च शांतिपूर्ण था और प्रदर्शनकारियों को बिना उकसावे के हिरासत में लिया गया। छात्र नेताओं का आरोप है कि परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया। झड़प के दौरान एक छात्र के हाथ में चोट आने और हिरासत के दौरान एक छात्रा के अस्वस्थ होने की भी जानकारी सामने आई है।
यह प्रदर्शन कुलगुरु Shantishree D. Pandit के कथित जातिसूचक बयान के विरोध में तथा शिक्षा मंत्रालय तक अपनी मांगें पहुंचाने को लेकर आयोजित किया गया था।
विश्वविद्यालय प्रशासन का बयान
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि छात्रसंघ द्वारा यूजीसी नियम लागू करने की मांग इस समय व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि इस संबंध में मामला न्यायालय में विचाराधीन है। प्रशासन का यह भी कहना है कि हाल में कुछ छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई का कारण परिसर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और हिंसा से जुड़ी घटनाएं हैं, जिनकी जांच प्राक्टोरियल प्रक्रिया के तहत की गई।
प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि तोड़फोड़ और हिंसा के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए कुलगुरु पर व्यक्तिगत आरोप लगाए जा रहे हैं। मामले की जांच जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।
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