केरल सरकार ने की नवीन बाबू केस में सीबीआई जांच की सिफारिश

केरल सरकार ने पूर्व कन्नूर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) नवीन बाबू की मौत से जुड़े मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की सिफारिश करने का फैसला लिया है। इस निर्णय के बाद यह मामला अब केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में जांच के लिए आगे बढ़ सकता है।
यह निर्णय मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया, जिसमें दिवंगत अधिकारी के परिजनों की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार किया गया। परिवार ने पहले की पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) की जांचों पर भरोसा नहीं जताते हुए बार-बार सीबीआई जांच की मांग की थी।
बेटी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी का फैसला
कैबिनेट ने राजस्व विभाग को यह भी निर्देश दिया है कि नवीन बाबू की बेटी को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू की जाए। यह कदम सरकार द्वारा लिए गए संवेदनशील फैसलों में से एक माना जा रहा है।
गौरतलब है कि यह नया सरकार गठन के बाद सीबीआई जांच की सिफारिश से जुड़ा पहला मामला है। इससे पहले राज्य सरकार ने राज्य में सीबीआई को स्वतः जांच करने की सामान्य अनुमति वापस ले ली थी, जिसके चलते अब किसी भी केस में केंद्रीय एजेंसी को जांच के लिए विशेष अनुमति आवश्यक होती है।
पीपी दिव्या पर बढ़ी राजनीतिक गर्मी
इस फैसले के बाद सीपीआई(एम) नेता और पूर्व कन्नूर जिला पंचायत अध्यक्ष पी.पी. दिव्या को लेकर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है। विपक्ष पहले से ही उन पर मामले को प्रभावित करने के आरोप लगाता रहा है। वर्तमान में दर्ज आरोपपत्र में उन्हें ही एकमात्र आरोपी बताया गया है।
परिजनों का शुरू से ही कहना रहा है कि स्थानीय पुलिस और एसआईटी की जांच से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है और इसलिए वे लगातार सीबीआई जांच की मांग करते रहे हैं।
कैसे हुई थी नवीन बाबू की मौत
नवीन बाबू को 15 अक्टूबर 2024 को कन्नूर स्थित पल्लिकुनु में उनके आधिकारिक आवास पर मृत पाया गया था। उनकी मौत उस दिन के बाद हुई, जब कलेक्ट्रेट में उनके विदाई समारोह के दौरान तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष पी.पी. दिव्या बिना आमंत्रण के पहुंची थीं और उन पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना के बाद वे मानसिक रूप से व्यथित होकर कलेक्ट्रेट से चले गए थे। बाद में उन्होंने यात्रा के लिए ट्रेन टिकट भी बुक किया था, लेकिन अगले दिन उनका शव उनके आवास से बरामद हुआ।
इस घटना ने पूरे केरल में राजनीतिक विवाद और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था, जिसके बाद पी.पी. दिव्या को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और बाद में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।




















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