केरल में सत्ता बदलते ही बड़ा एक्शन, 2023 में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमले की एसआईटी जांच के आदेश

HIGHLIGHTS
- राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
- नवनियुक्त मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने पदभार संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 2023 में हुई ‘नव केरल यात्रा’ के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के निर्देश जारी किए हैं।
- यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में चली उस यात्रा से जुड़ा है, जिसके दौरान काले झंडे दिखाने को लेकर कांग्रेस और यूडीएफ कार्यकर्ताओं तथा पुलिस के बीच तनावप…
केरल। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नवनियुक्त मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने पदभार संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 2023 में हुई ‘नव केरल यात्रा’ के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के निर्देश जारी किए हैं।
यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में चली उस यात्रा से जुड़ा है, जिसके दौरान काले झंडे दिखाने को लेकर कांग्रेस और यूडीएफ कार्यकर्ताओं तथा पुलिस के बीच तनावपूर्ण झड़प की स्थिति बनी थी। उस समय स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि कई कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज और मारपीट के आरोप सामने आए थे।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस और सुरक्षा दलों द्वारा कथित रूप से बल प्रयोग किया गया था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एमएम हसन ने इसे लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि विरोध दर्ज कराने वाले कार्यकर्ताओं पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और उन्हें निशाना बनाया गया।
15 दिसंबर 2023 को अलाप्पुझा से नवनिर्वाचित विधायक एडी थॉमस और यूथ कांग्रेस के प्रदेश सचिव अजय ज्यूल कुरियाकोस भी उस घटना में घायल हुए थे। बताया जाता है कि इस मामले में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई थी, जिससे विवाद और बढ़ गया।
विधानसभा चुनावों में सत्ता परिवर्तन के बाद इस मामले की दोबारा जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई थी। इसी पृष्ठभूमि में नई सरकार ने SIT जांच का फैसला लिया है।
घटना के दौरान जनरल हॉस्पिटल जंक्शन के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था, जहां काले झंडे दिखा रहे कार्यकर्ताओं को हटाने के दौरान स्थिति बिगड़ गई थी। आरोप है कि इसके बाद सुरक्षाकर्मियों और कुछ पुलिसकर्मियों ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे।
हालांकि उस समय पुलिस ने शुरुआत में कोई मामला दर्ज नहीं किया था, लेकिन बाद में अदालत के हस्तक्षेप के बाद प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई थी।
मामले में यह भी आरोप लगे कि जांच के दौरान संबंधित सुरक्षा कर्मियों को कई बार समन भेजे गए, लेकिन वे पेश नहीं हुए। बाद में उनका बयान तिरुवनंतपुरम में दर्ज किया गया। इस दौरान संबंधित अधिकारी को पदोन्नति मिलने की बात भी सामने आई, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.