मेधा पाटकर मानहानि केस: दिल्ली एलजी वीके सक्सेना को अदालत ने किया बरी

नई दिल्ली। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने सोशल एक्टिविस्ट मेधा पाटकर और दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना के बीच चले 20 साल पुराने मानहानि मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को बरी कर दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोपों को पर्याप्त प्रमाणों के जरिए साबित नहीं किया जा सका। इसी वजह से अदालत ने वीके सक्सेना और मेधा पाटकर दोनों को आईपीसी की धारा-500 के तहत दंडनीय अपराध से मुक्त कर दिया।
यह विवाद 2006 का है। उस समय वीके सक्सेना ने राष्ट्रीय सिविल लिबर्टीज़ काउंसिल (एनसीसीएल) के अध्यक्ष के रूप में मेधा पाटकर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम के दौरान पाटकर ने उन पर सरदार सरोवर निगम से सिविल कॉन्ट्रैक्ट लेने का आरोप लगाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।
साकेत कोर्ट के फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने सुनाए फैसले में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता आरोपी को उचित संदेह से परे साबित करने में असफल रहे। इस तरह मामले में दोनों पक्षों को दोषमुक्त कर दिया गया।
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