नए शिक्षा विधेयक से राज्यों के अधिकारों में होगा हस्तक्षेप: जयराम रमेश का आरोप

कांग्रेस ने गुरुवार को विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 पर गंभीर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि यह संविधान के संघीय ढांचे का उल्लंघन करता है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने विधेयक में सात प्रमुख खामियां गिनाईं। इनमें राज्यों से परामर्श न करना, संवैधानिक अतिक्रमण, फंडिंग काउंसिल का अभाव, उच्च शिक्षा का बढ़ता नौकरशाहीकरण और यूजीसी की परामर्श प्रक्रिया कमजोर होना शामिल हैं।
संघीय ढांचे के खिलाफ
जयराम रमेश ने कहा कि यह विधेयक उच्च शिक्षा की पूरी संरचना को फिर से बदलने का प्रयास है। विधेयक फिलहाल संसद की संयुक्त समिति के पास विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग की स्थायी समिति की रिपोर्ट में यूजीसी और एआईसीटीई जैसे नियामक संस्थानों में बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं, जो चिंता का विषय हैं।
रमेश ने आरोप लगाया कि शिक्षा समवर्ती सूची का मामला होने के बावजूद राज्य सरकारों से कोई परामर्श नहीं किया गया, जबकि इसका सीधा असर राज्य विश्वविद्यालयों पर पड़ेगा। कांग्रेस का कहना है कि विश्वविद्यालयों के गठन और संचालन जैसे विषय राज्य सूची में आते हैं। इसलिए, विधेयक संघीय ढांचे के खिलाफ है।
उच्च शिक्षा में नौकरशाही का दखल
जयराम रमेश ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उच्च शिक्षा परिषद के चार स्तंभों की परिकल्पना की गई थी, लेकिन इस विधेयक में केवल तीन काउंसिल का प्रावधान है और अनुदान देने वाली संस्था शामिल नहीं है। उनका आरोप है कि इससे वित्तीय शक्तियां स्वायत्त शैक्षणिक निकायों से हटकर सीधे मंत्रालय के पास चली जाएंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई का संचालन शिक्षाविदों द्वारा होता है, लेकिन नए विधेयक में प्रशासनिक नियंत्रण नौकरशाहों के हाथ में देने का प्रस्ताव है, जो शिक्षा के लिए हानिकारक है।
राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की स्वायत्ता पर असर
कांग्रेस ने यह चिंता जताई कि विधेयक के तहत आईआईटी, आईआईएम और एनआईटी जैसी संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। विधेयक में स्वायत्ता बनाए रखने की बात कही गई है, लेकिन प्रावधान अस्पष्ट हैं।
कांग्रेस का कहना है कि नए नियमों के तहत विश्वविद्यालयों को नए परिसर या कार्यक्रम शुरू करने के लिए अतिरिक्त अनुमतियां लेनी होंगी, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 संस्थानों को अधिक स्वायत्तता देने पर जोर देती है।
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