नोएडा डीएम मेधा रूपम को सुप्रीम कोर्ट से राहत, हाई कोर्ट के 5 लाख जुर्माने पर रोक

HIGHLIGHTS
- मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
- हाई कोर्ट ने डीएम की सैलरी से पांच लाख रुपये काटकर छात्रा को देने का निर्देश दिया था।
- सुप्रीम कोर्ट ने छात्रा और अन्य को नोटिस जारी किया।
- शीर्ष अदालत ने दो अलग-अलग याचिकाओं पर अंतरिम आदेश पारित किया।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी (डीएम) मेधा रूपम को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें नोएडा में अप्रैल में हुए मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रा आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में रखने को लेकर डीएम पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
हाई कोर्ट ने यह राशि मेधा रूपम की सैलरी से काटकर छात्रा को देने का निर्देश दिया था। रूपम ने हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जुर्माने के आदेश पर रोक
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मेधा रूपम की याचिका पर छात्रा और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही आकृति चौधरी की हिरासत रद्द करने वाले हाई कोर्ट के आदेश पर भी रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने मेधा रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल दो अलग-अलग याचिकाओं पर अंतरिम आदेश पारित किया।
पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश में डीएम के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर भी रोक लगा दी। सुनवाई के दौरान पीठ ने उत्तर प्रदेश की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और मेधा रूपम की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनीं।
दलील दी गई कि डीएम ने एसएचओ, डीसीपी और आयुक्त के जरिए उनके पास पहुंची सामग्री के आधार पर कार्रवाई की थी। इस दौरान यह भी बताया गया कि रासुका सलाहकार बोर्ड ने बाद में हिरासत की समीक्षा की थी।
दो सितंबर को हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी की हिरासत रद्द की थी
बता दें कि दो सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक की पढ़ाई कर चुकी आकृति चौधरी की हिरासत रद्द कर दी थी। 25 वर्षीय आकृति को अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के संबंध में रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था।
'डीएम को अकेले कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता'
एएनआइ के अनुसार, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "रासुका लगाने की प्रक्रिया कई स्तरों पर चली थी तो डीएम को अकेले कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
हम उन्हें अलग-थलग करके पांच लाख रुपये का जुर्माना कैसे लगा सकते हैं।"
रोहतगी ने दलील दी कि मजदूरों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद छात्रा को हिरासत में लिया गया था। उन्होंने वाट्सएप समेत मोबाइल फोन से मिली जानकारी का भी उल्लेख किया। अधिकारियों ने इसी जानकारी के आधार पर आरोप लगाया था कि आकृति चौधरी उकसावे वाली गतिविधियों में शामिल थी।
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