सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण पर ओवैसी ने उठाए सवाल, कहा- मजहबी आजादी का क्या?

HIGHLIGHTS
- सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद ध्वस्त किए जाने पर ओवैसी ने सवाल उठाए।
- ओवैसी ने 1911 के दस्तावेजों का उल्लेख किया।
- वक्फ बाय यूजर और लिमिटेशन एक्ट का हवाला दिया।
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद मस्जिद को शनिवार सुबह पांच बजे ध्वस्त किए जाने के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। ओवैसी ने पूछा कि क्या अब मुसलमानों को संविधान से मिला धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भी नहीं रहा। उन्होंने सवाल किया कि इबादतगाहों पर बार-बार कमजोर और मनगढ़ंत कारणों का हवाला देकर बुलडोजर क्यों चलाया जाता है।
1911 के दस्तावेजों का ओवैसी ने किया उल्लेख
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मस्जिद कमेटी ने अदालत के सामने 1911 के दस्तावेज पेश किए थे। उनके अनुसार, इन दस्तावेजों के जरिए यह साबित करने का प्रयास किया गया कि मस्जिद कलेक्ट्रेट के निर्माण से पहले से वहां मौजूद थी।
ओवैसी ने कहा कि वहां एक सदी से भी ज्यादा समय से लगातार नमाज अदा की जाती रही है। उन्होंने कहा कि यह कोई हाल में बनाई गई इमारत नहीं थी, बल्कि लंबे समय से इसका इस्तेमाल इबादतगाह के रूप में होता रहा है।
वक्फ बाय यूजर और लिमिटेशन एक्ट का दिया हवाला
अपने बयान में ओवैसी ने वक्फ बाय यूजर का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी स्थान का लंबे समय तक इबादतगाह के रूप में इस्तेमाल किया जाना भी कानूनी महत्व रखता है। उन्होंने लिमिटेशन एक्ट का हवाला देते हुए जमीन पर सरकार के दावे पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि जब किसी जमीन पर एक सदी से ज्यादा समय से खुले तौर पर और लगातार कब्जा रहा हो, तो सरकार अचानक उसे नजरअंदाज कर यह दावा नहीं कर सकती कि जमीन अब उसकी है। ओवैसी ने कहा कि इतने लंबे समय से कब्जे को देखते हुए प्रतिकूल कब्जे का सवाल भी उठता है।
'मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया'
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया।' उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को मस्जिद दिखाई देने से परेशानी हो सकती है, लेकिन यह उनका मुद्दा है।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि अपनी खुन्नस निकालने के लिए किसी मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता किसी की दया पर निर्भर नहीं है।
'हमारी इबादतगाहों पर बुलडोजर क्यों?'
ओवैसी ने सवाल किया कि अगर किसी धार्मिक स्थल को लेकर विवाद है तो बार-बार इबादतगाहों पर बुलडोजर की कार्रवाई क्यों की जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सहारनपुर की मस्जिद का मामला केवल एक इमारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवाल भी सामने आते हैं।
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