सीजेपी आंदोलन का राजनीतिकरण और हिंसा अनुचित, जल्द निकले शांतिपूर्ण रास्ता: मायावती

HIGHLIGHTS
- मायावती ने सीजेपी आंदोलन के राजनीतिकरण और हिंसा को अनुचित बताया।
- उन्होंने सरकार और आंदोलनकारियों से बातचीत कर जल्द समाधान निकालने की अपील की।
- मायावती ने पेपर लीक और अन्य मामलों को भ्रष्टाचार से जुड़ा मुद्दा बताया।
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बढ़ते आंदोलन को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा अपने-अपने हितों के लिए राजनीतिकरण करना और सड़क से संसद तक टकराव व हिंसा की स्थिति बनना उचित नहीं है।
मायावती ने कहा कि सरकार और आंदोलनकारियों को मिलकर इस मामले का जल्द से जल्द शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश और जनहित से जुड़े मौजूदा हालात के समाधान के लिए सरकार तथा न्यायालय जैसी संवैधानिक संस्थाओं को अपनी भूमिका निभाने की पहल करनी चाहिए।
बसपा सुप्रीमो ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि सीजेपी का दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन आंदोलन चल रहा है। यह आंदोलन NEET जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से प्रभावित छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों के मुद्दों को लेकर है।
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर सड़क से संसद तक हंगामा हो रहा है। अब इसके राजनीतिकरण के कारण यह मुद्दा सरकार के साथ सीधे टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से देश को बाहर निकालना जरूरी है, क्योंकि इसका असर दिल्ली के साथ-साथ विभिन्न राज्यों में आम जनजीवन पर भी पड़ रहा है।
मायावती ने आगे कहा कि अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला हो या फिर केंद्र और राज्यों की परीक्षाओं में पेपर लीक का मुद्दा, ये सभी भ्रष्टाचार के बढ़ने का परिणाम हैं।
उन्होंने कहा कि यह मामला संवैधानिक नैतिकता से भी जुड़ा हुआ है। इसके अभाव में भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह नुकसान पहुंचा रहा है।
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