राहुल गांधी का EC पर हमला, बोले- पहले शिवसेना, फिर NCP और अब TMC

HIGHLIGHTS
- राहुल गांधी ने शुक्रवार सुबह एक्स पर पोस्ट साझा की।
- उन्होंने शिवसेना और NCP के मामलों का भी जिक्र किया।
- TMC के दोनों गुटों के बीच पार्टी को लेकर विवाद है।
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनावों को लेकर चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों गुटों को उपचुनाव में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
राहुल गांधी ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ने और उनके चुनाव चिह्न छीनने का काम कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने EC पर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में एक जैसा पैटर्न दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को विभाजित करते हैं और इसके बाद उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है।
उन्होंने आगे लिखा कि अगर पूरी पार्टी को ही चोरी किया जा सकता है तो करोड़ों भारतीयों के वोटों की चोरी भी हैरानी की बात नहीं होगी।
राहुल गांधी ने लोकतंत्र को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। उनके मुताबिक चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन इसके उलट वह उन ताकतों की मदद कर रहा है जो जनता के फैसले को पलटना चाहती हैं।
कांग्रेस नेता ने ममता बनर्जी के समर्थन में कहा कि यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी की नहीं है, बल्कि हर राजनीतिक दल और हर उस मतदाता की है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर EC की रोक
राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद आई है। आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दो गुटों के बीच पार्टी को लेकर विवाद को देखते हुए दोनों को TMC के नाम और ‘फूल और घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है।
आयोग के आदेश के अनुसार, दोनों गुटों को उपचुनाव अलग-अलग नामों और चुनाव आयोग की ओर से आवंटित अलग-अलग चुनाव चिह्नों के साथ लड़ना होगा। यह अंतरिम व्यवस्था विवाद पर अंतिम निर्णय होने तक लागू रहेगी।
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