TMC नाम और सिंबल फ्रीज होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी

HIGHLIGHTS
- तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिह्न मिले।
- ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।
- नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान किया गया।
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद के बीच ममता बनर्जी के गुट को एक और झटका लगा है। शुक्रवार को नंदीग्राम से ममता गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इससे पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव तक तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था।
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न के लिए तीन-तीन विकल्प मांगे थे। विकल्प मिलने के बाद आयोग ने दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग की अंतरिम रोक के खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। आयोग ने दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद के चलते 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी किया था।
आयोग के नए फैसले के बाद दोनों गुट नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरेंगे।
चुनाव आयोग ने लगाई थी रोक
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ के आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया था। आयोग ने यह व्यवस्था अंतिम निर्णय होने तक लागू रखने की बात कही थी।
ममता बनर्जी ने आयोग के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वह इस निर्णय को स्वीकार नहीं करेंगी और राजनीतिक, लोकतांत्रिक तथा कानूनी तरीके से लड़ाई जारी रखेंगी।
नंदीग्राम से ममता गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान के नामांकन वापस लेने के बाद अब इस सीट पर उनकी ओर से कोई प्रत्याशी नहीं रहेगा। इसके बाद ममता बनर्जी के गुट ने नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान किया है।
वहीं, रेजीनगर सीट पर नाम वापसी की अंतिम तारीख 19 सितंबर है। ऐसे में इस सीट पर दोनों गुटों के बीच मुकाबले को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है।
चुनाव चिह्न का रहा है अहम महत्व
ममता बनर्जी ने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था। पार्टी के गठन के बाद से ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न तृणमूल कांग्रेस की पहचान का हिस्सा रहा है। चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश पार्टी के भीतर हुए विवाद के बाद आया है।
पार्टी के भीतर विवाद के बाद दोनों गुट तृणमूल कांग्रेस के नाम और संगठन पर अपना दावा कर रहे हैं। इसी विवाद के बीच आयोग ने आगामी उपचुनावों को देखते हुए दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं।
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