होर्मुज संकट पर भारत की दो टूक, समुद्री व्यापार को भू-राजनीतिक तनाव से दूर रखने की अपील

HIGHLIGHTS
- पी. हरीश ने सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत का पक्ष रखा।
- भारत ने नेविगेशन के अधिकारों में हस्तक्षेप का विरोध किया।
- 449 से ज्यादा वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित गुजरने दिया गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए टकराव का असर भारत के जहाजों और नागरिकों पर भी पड़ा है। भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की बात दोहराते हुए कहा है कि समुद्री व्यापारिक गतिविधियों को भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
पी. हरीश ने क्या कहा?
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद में कहा कि नेविगेशन के अधिकारों पर किसी तरह की जबरदस्ती, धमकी, गैर-कानूनी प्रतिबंध या मनमाना हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक प्रमुख समुद्री देश है और वह स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित तथा नियमों पर आधारित समुद्री क्षेत्र का मजबूती से समर्थन करता है।
हरीश ने बहरीन द्वारा बुलाई गई सुरक्षा परिषद की अनौपचारिक बैठक में समुद्री सुरक्षा के मौजूदा माहौल पर चर्चा की। यह बैठक 'आरिया-फॉर्मूला' के तहत आयोजित की गई थी। इसका नाम वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो आरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1992 में इस संस्था की अध्यक्षता करते हुए इस तरह की बैठकों की शुरुआत की थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से क्या हुआ?
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। इससे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई और दुनियाभर में पेट्रोलियम की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई। हरीश ने कहा कि खाड़ी और पश्चिम एशिया में उत्पन्न इस तरह की रुकावटों का असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ता है, विशेष रूप से ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर।
हालांकि, उन्होंने उन घटनाओं या हमलों में शामिल पक्षों के नाम नहीं लिए, जिनके चलते ईरान, अमेरिका और खाड़ी के अन्य देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए टकराव के दौरान भारत को नुकसान हुआ।
नाविकों की मौत का विरोध जताया
भारत ने ईरान और अमेरिका के सामने अपने नाविकों की मौत को लेकर विरोध दर्ज कराया है। इसके अलावा तेहरान के सामने भारत में पंजीकृत जहाज पर हुए हमले की शिकायत भी की गई है। अप्रैल में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गनबोट्स ने भारतीय झंडे वाले दो टैंकरों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई थीं।
जुलाई में संयुक्त अरब अमीरात में पंजीकृत दो जहाजों पर ईरानी हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हुई थी, जबकि दूसरा घायल हो गया था। भारत ने नई दिल्ली में ईरानी राजनयिकों के सामने दोनों घटनाओं को लेकर विरोध जताया।
जून में भारत ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स को तलब कर तीन भारतीय नाविकों की मौत का विरोध किया था। इन नाविकों की मौत उस समय हुई थी, जब अमेरिका ने पलाऊ में पंजीकृत उनके जहाज पर हमला किया था।
अब तक कितने सुरक्षित जहाज गुजरे हैं?
हरीश ने बताया कि भारत अपनी नौसेना की तैनाती के जरिए इस क्षेत्र के अशांत समुद्री इलाकों में समुद्री सुरक्षा में योगदान दे रहा है। उनके मुताबिक, सोमवार तक भारतीय सुरक्षा अभियानों के तहत 449 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों को अदन की खाड़ी और लाल सागर से सुरक्षित गुजरने दिया गया। इन जहाजों में करीब 20.3 मिलियन टन कार्गो या 8.4 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य का तेल शामिल था।
ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा का किया जिक्र
लाल सागर में पैदा हो रही रुकावटों के पीछे हूथी मिलिशिया को बताया गया है। यह यमन का एक विद्रोही समूह है और ईरान से जुड़ा हुआ है। हरीश ने कहा कि समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना ने मार्च में पश्चिमी अरब सागर में 11 जहाजों के साथ 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' शुरू किया था।
फंसे भारतीय नाविकों के बारे में क्या कहा?
संघर्ष में शामिल दोनों पक्षों की नाकेबंदी के कारण सैकड़ों भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर फंसे हुए हैं। उनके मुद्दे पर हरीश ने कहा कि समुद्री यात्रियों को सामूहिक प्रयासों के केंद्र में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा, समय पर सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता, क्रू बदलने और स्वदेश वापसी के लिए प्रभावी आकस्मिक योजना तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।
हरीश ने तकनीक में हो रहे बदलावों से उत्पन्न नए खतरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली उभरते खतरों से निपटने के बढ़ते महत्व को समझती है। इनमें बिना चालक वाले सिस्टम से होने वाले हमले, साइबर जोखिम तथा नेविगेशन और संचार में दखल जैसी चुनौतियां शामिल हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, क्षमता निर्माण और तकनीक का जिम्मेदार इस्तेमाल बेहद जरूरी होगा।
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