‘वोट चोरी’ के आरोपों पर राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- ‘जब समय आएगा, पकड़ेंगे’

HIGHLIGHTS
- राहुल गांधी ने एक्स पर वीडियो शेयर कर चुनाव आयोग के अधिकारियों को निशाने पर लिया
- राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग जो कर रहा है, वह गलत है
- उन्होंने कहा कि यह देश के खिलाफ है
- अपनी पोस्ट में राहुल गांधी ने वोट की चोरी को अपराध बताया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि वह चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बता रहे हैं कि जो किया जा रहा है, वह गलत है और देश के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जब समय आएगा तो उन्हें पकड़ा जाएगा और वे बच नहीं पाएंगे।
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ अपराध है। उन्होंने इसे संविधान पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि इसे अंजाम देने वाले भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। राहुल गांधी ने कहा कि इंसाफ जरूर होगा।
इसके कुछ देर बाद कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी प्रेस वार्ता की। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने पूरे चुनाव आयोग को हाईजैक कर रखा है और अपने साथियों को भ्रम में रखा है। सिंघवी ने कहा कि आयोग का कोई फैसला अकेले नहीं लिया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में संवैधानिक संस्थाएं बिल्कुल भी स्वतंत्र नहीं हैं।
रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने, चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटाबेस के नियंत्रण से जुड़े मामले शामिल बताए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ ऐसे फैसलों और आदेशों पर सवाल उठाए, जिनको लेकर उनका कहना था कि उनकी जानकारी या सहमति नहीं ली गई। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।
ओपी रावत ने फॉर्म-6 में बदलाव पर क्या कहा?
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलाव करना गलत और गैरकानूनी है। रावत के मुताबिक, यदि फॉर्म में बदलाव करना है तो संबंधित नियमों में संशोधन की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि विवेक जोशी ने मई में फॉर्म-6 में एसआईआर से संबंधित घोषणा जोड़ने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने नियमों में बदलाव किए बिना इसे लागू किए जाने पर सवाल उठाया था। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस बदलाव को अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए इसे तत्काल हटाने की बात कही थी।
मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर को लेकर भी सवाल
ओपी रावत ने मतदाता सूची के डेटाबेस और उसके सॉफ्टवेयर के नियंत्रण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए, जिसमें किसी क्षेत्र के अधिकारी मतदाता सूची में किए गए बदलाव को सही मानें, लेकिन सॉफ्टवेयर उन्हें उसे दर्ज करने की अनुमति ही न दे।
रावत ने कहा कि किसी एक स्तर पर सभी अधिकारों का केंद्रीकरण नहीं होना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाता सूची के डेटाबेस के नियंत्रण में बदलाव को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन से भी संपर्क किया था। रावत ने कहा कि इस तरह के घटनाक्रम से चुनाव आयोग पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
चुनाव आयोग ने मतभेद के आरोपों पर क्या कहा?
चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन घटनाक्रमों को औपचारिक असहमति के तौर पर स्वीकार नहीं किया है। आयोग का कहना है कि एसआईआर सहित उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
वहीं, ओपी रावत ने कहा कि यदि दो चुनाव आयुक्तों ने किसी फैसले को लेकर लगातार आपत्तियां दर्ज कीं, तो यह गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि दोनों आयुक्तों को कुछ फैसले गलत लग रहे थे तो उन्होंने पहले ही इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की।
इस तरह एक तरफ राहुल गांधी और विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग अपने फैसलों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मत बता रहा है।
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