उत्तराखंड: राज्यसभा सीट पर BJP में मंथन, वैश्य समाज से नए चेहरे को मिल सकता है मौका

HIGHLIGHTS
- राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा होगा
- नरेश बंसल संघ और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं
- उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं
- उनकी सीट खाली होने के साथ नए चेहरे को लेकर चर्चा शुरू हुई
उत्तराखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भाजपा के लिए राज्यसभा सांसद का चुनाव करना आसान माना जा रहा है। पार्टी इस बार चेहरा बदल सकती है, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह माना जा रहा है कि राज्यसभा भेजे जाने वाला चेहरा वैश्य समाज से हो सकता है। इसे लेकर भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं।
राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है। वह संघ और भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं और राष्ट्रीय व राज्य संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उनकी सीट खाली होने के साथ ही अब भाजपा के नए राज्यसभा चेहरे को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
उत्तराखंड में भाजपा के पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें तो पार्टी ने राज्यसभा के लिए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मौका दिया है। अब तक किसी चेहरे को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया है। ऐसे में इस बार भी यही परंपरा जारी रहेगी या इसमें बदलाव होगा, इस पर सभी की नजरें हैं।
उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में शहरी क्षेत्रों में प्रभाव के कारण वैश्य समाज को महत्वपूर्ण माना जाता है। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और हल्द्वानी की करीब 15-20 विधानसभा सीटों पर इनकी पांच से 12 प्रतिशत हिस्सेदारी करीबी मुकाबलों में स्विंग फैक्टर साबित होती है। पारंपरिक तौर पर इस समाज को भाजपा का मजबूत कोर वोटर माना जाता रहा है।
इसी वजह से यह चर्चा है कि राज्यसभा जाने वाला भाजपा का अगला चेहरा वैश्य समाज का प्रतिनिधि हो सकता है। वर्तमान सांसद के अलावा पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के नामों पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
भाजपा से कौन कब रहा राज्यसभा सांसद
सुषमा स्वराज (2000–2006): राज्य गठन के समय आवंटित सीट पर रहीं। बाद में मध्य प्रदेश से राज्यसभा गईं।
मनोहर कांत ध्यानी (1996–2002): उत्तराखंड बनने के बाद बचा हुआ कार्यकाल पूरा किया। इसके बाद उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला।
भगत सिंह कोश्यारी (2008–2014): अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा और नैनीताल से सांसद बने।
तरुण विजय (2010–2016): छह साल का कार्यकाल पूरा किया और उन्हें दोबारा रिपीट नहीं किया गया।
अनिल बलूनी (2018–2024): राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद 2024 में पौड़ी गढ़वाल से लोकसभा चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंचे।
नरेश बंसल (2020–2026): वर्ष 2020 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। उनका कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा होगा।
डॉ. कल्पना सैनी (2022 से वर्तमान): वर्ष 2022 में उच्च सदन पहुंचीं।
महेंद्र भट्ट (2024 से वर्तमान): वर्ष 2024 में निर्विरोध राज्यसभा पहुंचे।
25 सितंबर को कोर कमेटी की बैठक में तय होगा पैनल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के मुताबिक, 25 सितंबर को कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई है। राज्यसभा चुनाव के लिए जो भी कार्यकर्ता अपनी दावेदारी पेश करेंगे, उनमें से तीन नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा।
उन्होंने बताया कि इसी पैनल के आधार पर केंद्रीय नेतृत्व राज्यसभा प्रत्याशी के नाम की घोषणा करेगा। चेहरा बदलेगा या नहीं, इसका पता भी पैनल में शामिल किए जाने वाले नामों से स्पष्ट हो जाएगा।
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