‘कैदियों को बिरयानी मिल सकती है तो बच्चों को क्यों नहीं’, ब्रेकफास्ट स्कीम पर मंत्री का बयान

HIGHLIGHTS
- योजना का विस्तार कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए किया जा रहा है।
- नॉन-वेज विकल्प को लेकर पहले पायलट प्रोजेक्ट पर विचार होगा।
- स्वच्छता और साफ-सफाई के मानकों की कड़ी जांच की जाएगी।
चेन्नई। तमिलनाडु की ‘पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम’ के तहत आने वाले नए मेन्यू में चिकन बिरयानी जैसे नॉन-वेज विकल्प शामिल किए जाने पर विचार किया जा रहा है। यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय मंगलवार, 22 सितंबर को इस योजना का विस्तार कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए करने जा रहे हैं।
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूली शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने चिकन बिरयानी जैसे नॉन-वेज विकल्पों को मेन्यू में शामिल करने की संभावना के संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया कि मेन्यू में नए बदलावों पर विचार किया जा रहा है।
पत्रकारों से बातचीत में राजमोहन ने कहा कि लंबे समय के लक्ष्य के तहत छात्रों को नॉन-वेज भोजन का विकल्प देने पर विचार किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए पहले पायलट प्रोजेक्ट शुरू करना होगा और साफ-सफाई के कड़े मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री विजय ने छात्रों के लिए अलग-अलग तरह के स्वादिष्ट मेन्यू विकल्प तैयार करने के लिए एक विशेष कमेटी गठित करने का आदेश दिया है।
राजमोहन ने कहा, “मैं पूरे सम्मान के साथ कहता हूं कि जेल में कैदी को भी चिकन बिरयानी खाने को मिलती है, तो मेरे स्कूलों के बच्चे चिकन बिरयानी क्यों नहीं खा सकते?”
पायलट प्रोजेक्ट और टेस्टिंग जरूरी
मंत्री ने स्पष्ट किया कि नॉन-वेज विकल्प को तुरंत लागू नहीं किया जा सकता। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के साथ कड़ी टेस्टिंग करनी होगी, ताकि साफ-सफाई और स्वच्छता से जुड़े मानकों को पूरा किया जा सके।
15 लाख से अधिक छात्रों को मिलेगा लाभ
रिपोर्ट के अनुसार, योजना के विस्तार से करीब 15.30 लाख और छात्र लाभान्वित होंगे। इस योजना के लिए चालू वित्त वर्ष में 217.63 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड आवंटित किया गया है। इसके बाद कार्यक्रम का कुल बजट बढ़कर 724 करोड़ रुपये हो गया है।
मेन्यू में उपमा, खिचड़ी और पोंगल शामिल हैं। इसके अलावा सप्ताह में दो बार मोटे अनाज से तैयार खाद्य पदार्थ भी छात्रों को दिए जाएंगे।
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