राहुल गांधी के 'छात्र, मूर्ख और अंधभक्त' वाले बयान पर लोकसभा में हंगामा, किरेन रिजिजू ने जताई आपत्ति

HIGHLIGHTS
- राहुल गांधी ने लोकसभा में छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
- भाषण के दौरान 'छात्र, मूर्ख और अंधभक्त' वाली टिप्पणी पर सदन में हंगामा हुआ।
- किरण रिजिजू ने टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए असंसदीय शब्दों को कार्यवाही से हटाने की मांग की।
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक छात्रा से हुई बातचीत का हवाला देते हुए 'छात्र', 'मूर्ख' और 'अंधभक्त' की तीन श्रेणियों का जिक्र किया। राहुल गांधी के इस बयान पर सदन में कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।
छात्रा से बातचीत का किया जिक्र
राहुल गांधी ने कहा कि एक छात्रा ने उन्हें तीन तरह के लोगों की श्रेणियों के बारे में बताया था। उनके अनुसार, पहली श्रेणी उन छात्रों की है जो सच को स्वीकार करने का साहस रखते हैं। दूसरी श्रेणी के बारे में छात्रा ने कहा कि ऐसे लोग अपनी एक बड़ी छवि बनाने की कोशिश करते हैं, क्योंकि वह छवि वास्तविक नहीं होती। तीसरी श्रेणी को छात्रा ने 'अंधभक्त' बताया और कहा कि ऐसा व्यक्ति यह मान लेता है कि कोई दूसरा बेवकूफ ही भगवान है।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि एक वर्ग विद्यार्थी का है, जो ज्ञान के मार्ग पर चलता है। बाकी दो वर्गों का नाम लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र किसी से डरता नहीं और न ही किसी पर हमला करता है, क्योंकि वह जानता है कि उसका सच दूसरे के सच से अलग हो सकता है। वहीं दूसरे वर्ग को अपनी बात मनवाने के लिए हिंसा और दबाव का सहारा लेना पड़ता है।
किरेन रिजिजू ने जताई आपत्ति
राहुल गांधी के बयान के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया होता तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होती। उन्होंने कहा कि भले ही राहुल गांधी ने यह बात किसी छात्र के हवाले से कही हो, लेकिन सदन में ऐसे शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है और इन्हें कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों का गुस्सा केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा का अत्यधिक निजीकरण हो चुका है, गरीबों से लाखों रुपये लिए जा रहे हैं और अलग-अलग परीक्षाओं में अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह खराब हो चुकी है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था और उसकी आत्मा पर आरएसएस का कब्जा है। राहुल गांधी ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि उनके अनुसार फैसले कहीं और से लिए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में आरएसएस से जुड़े कुलपति नियुक्त किए जा रहे हैं और छात्रों को अपनी पसंद का विषय या विचार अपनाने की पूरी आजादी नहीं मिल रही है।
छात्र आंदोलन पर कही यह बात
हाल के छात्र प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने देश के युवाओं की आवाज में भविष्य की उम्मीद देखी है। उनके अनुसार, सड़कों पर जो प्रदर्शन हुए, वे न तो हिंसा थे और न ही नफरत, बल्कि युवाओं की भावनाओं की अभिव्यक्ति थे। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इस भावना का सम्मान करना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि यदि भाजपा के नेता अपने बच्चों से इस आंदोलन के बारे में पूछेंगे तो उन्हें भी छात्रों के समर्थन की भावना देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ, उसमें कुछ भी गलत नहीं था और हर भारतीय को उस पर गर्व होना चाहिए।
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