लद्दाख मुद्दे पर उमर अब्दुल्ला का बयान, बोले- केंद्र से लिखित आश्वासन मिलने तक करें इंतजार

HIGHLIGHTS
- उमर अब्दुल्ला ने लद्दाख के मुद्दों को जम्मू-कश्मीर से अलग बताया।
- उन्होंने औपचारिक हलफनामे के रूप में आश्वासन लेने की बात कही।
- पुलवामा में करीब 100 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ।
पुलवामा। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लद्दाख के नेतृत्व को केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले मौखिक आश्वासनों पर भरोसा नहीं करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि भूमि और रोजगार से जुड़े संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर लद्दाख के नेताओं को लिखित और आधिकारिक आश्वासन मिलने तक इंतजार करना चाहिए।
पुलवामा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लद्दाख के मुद्दे जम्मू-कश्मीर से अलग हैं। हालांकि, एक मित्र और शुभचिंतक के तौर पर वह लद्दाख और कारगिल के नेताओं से कहना चाहेंगे कि जब तक केंद्र की ओर से लिखित और आधिकारिक रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेज नहीं मिल जाता, तब तक मौखिक आश्वासनों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन करीब दो साल गुजरने के बावजूद यह पूरा नहीं हुआ है। उमर ने कहा कि लद्दाख नेतृत्व को संभव हो तो औपचारिक हलफनामे के रूप में लिखित आश्वासन लेना चाहिए।
पुलवामा में विकास कार्यों की समीक्षा
मुख्यमंत्री बुधवार को पुलवामा जिले में विकास परियोजनाओं की समीक्षा करने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं को लागू करने और उपलब्ध बजट के इस्तेमाल के मामले में पुलवामा जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में शीर्ष पांच में जगह बना सकता है।
उमर अब्दुल्ला ने जिला प्रशासन के कामकाज की सराहना करते हुए अधिकारियों से मौजूदा कार्य सत्र के बचे दो-तीन महीनों में अधिक से अधिक धनराशि का इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने बताया कि बुधवार को पुलवामा में करीब 100 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया।
इन परियोजनाओं में सड़क, स्कूल, अस्पताल और पुलों से संबंधित कार्यों के साथ डेयरी-प्रोसेसिंग गांव की स्थापना भी शामिल है।
एनएचएम कर्मचारियों से आंदोलन खत्म कर बातचीत की अपील
एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनकी मांगों पर बातचीत आंदोलन खत्म होने के बाद ही की जाएगी। उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि आंदोलन जारी रहने के दौरान सरकार बातचीत नहीं कर सकती, क्योंकि इससे ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसमें दूसरे संगठन भी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को उचित समझें।
नेता प्रतिपक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया देने से इनकार
विधानसभा सत्र की अवधि को लेकर नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा के बयान पर मुख्यमंत्री ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष रोज बयान देते हैं और उनके पास हर दिन जवाब देने का समय नहीं है।
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