पश्चिम बंगाल में रेस्तरां और भोजनालयों पर छापेमारी, खाद्य सुरक्षा नियमों की हुई जांच

HIGHLIGHTS
- कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके के कई प्रसिद्ध रेस्तरां भी जांच के दायरे में आए।
- रेस्तरां की रसोई में साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को बारीकी से देखा गया।
- कांथी से जलपाईगुड़ी तक अलग-अलग भोजनालयों में अधिकारियों ने जांच की।
पश्चिम बंगाल सरकार की प्रवर्तन शाखा के अधिकारियों ने रविवार को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रेस्तरां और भोजनालयों पर छापेमारी की। इस दौरान यह जांच की गई कि इन जगहों पर खाद्य सुरक्षा से संबंधित नियमों और दिशानिर्देशों का पालन किया जा रहा है या नहीं। अधिकारियों के मुताबिक, कोलकाता के पॉश पार्क स्ट्रीट इलाके के कई मशहूर रेस्तरां में भी प्रवर्तन शाखा की टीमों ने पहुंचकर जांच की। इस दौरान रेस्तरां की रसोई का भी बारीकी से निरीक्षण किया गया।
जलपाईगुड़ी जिले के एक सरकारी अधिकारी ने कहा, "जहां भी खाद्य पदार्थ बेचे जाते हैं, उन सभी जगहों पर इस तरह की जांच जारी रहेगी।" मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा एक सितंबर को उपभोक्ता सुरक्षा सप्ताह के उद्घाटन के दौरान दिए गए निर्देश के तुरंत बाद प्रवर्तन शाखा और राज्य सरकार के अन्य अधिकारियों ने भोजनालयों का निरीक्षण शुरू कर दिया था।
सड़क किनारे की दुकानों से लेकर महंगे रेस्तरां तक जांच
अधिकारियों ने महंगे रेस्तरां के साथ-साथ सड़क किनारे संचालित दुकानों पर भी जांच की। इस दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों और दिशानिर्देशों के पालन की स्थिति को देखा गया। अधिकारी ने कहा था कि राज्य सरकार खाद्य पदार्थों में मिलावट के साथ खाने-पीने की चीजों और मिठाइयों में गैर-खाद्य गुणवत्ता वाले रंगों के इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कारोबारियों से पारदर्शी और साफ-सुथरे तरीके से व्यापार करने की अपील भी की थी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि कुछ अधिकारी अनुचित गतिविधियों को अनुमति देने में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था, "पूरी व्यवस्था सड़ चुकी है।"
रविवार को राज्य के दक्षिणी छोर पर स्थित कांथी से लेकर उत्तरी हिस्से के जलपाईगुड़ी तक भोजनालयों में अधिकारी जांच करते दिखाई दिए। इस दौरान यह देखा गया कि सभी निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
कार्रवाई को लेकर क्या बोला राज्य प्रशासन?
जांच के दौरान कीट नियंत्रण से लेकर ग्राहकों को बासी भोजन परोसे जाने की स्थिति तक की पड़ताल की गई। कोलकाता के प्रमुख खान-पान केंद्रों में शामिल कई बड़े रेस्तरां के खिलाफ अधिकारियों ने अलग-अलग कारणों से कार्रवाई की है।
इनमें घटिया गुणवत्ता वाले तेल का इस्तेमाल, साफ-सफाई की खराब व्यवस्था और मछली तथा मांस को उनकी उपयोग की अंतिम तारीख निकल जाने के बाद भी रखने जैसी अनियमितताएं शामिल हैं।
एफएसएसएआई ने किन कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए?
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने स्वच्छता और साफ-सफाई से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर पश्चिम बंगाल की दो कंपनियों कैलाश फॉर्मुलेशन और सैनेक्योर वाटर प्रोजेक्ट के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। खाद्य नियामक ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से दोनों कंपनियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी दी।
एफएसएसएआई ने कहा, “पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में चलाए गए प्रवर्तन अभियान के दौरान कैलाश फॉर्मुलेशन और सैनेक्योर वाटर प्रोजेक्ट के एफएसएसएआई लाइसेंस को स्वच्छता, साफ-सफाई और अनुपालन मानकों के गंभीर उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है।”
कैलाश फॉर्मुलेशन के मामले में एफएसएसएआई ने कहा कि अनिवार्य खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने के कारण लाइसेंस निलंबित करने का आदेश जारी किया गया है।
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