राकेश टिकैत का केंद्र पर हमला, बोले- रोजगार और पेपर लीक के मुद्दे पर लड़ रहे युवा

HIGHLIGHTS
- राकेश टिकैत ने दिल्ली छात्र आंदोलन को युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताया।
- उन्होंने सरकार से बल प्रयोग के बजाय बातचीत से समाधान निकालने की अपील की।
- टिकैत ने आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश का आरोप लगाया।
मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने दिल्ली में चल रहे छात्र-युवा आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन को बदनाम करने के लिए इसे "उग्र आंदोलन" बताने की कोशिश कर रही है, जबकि प्रदर्शनकारी युवा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं।
शुक्रवार सुबह अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए टिकैत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति पत्थर या डंडा लेकर हिंसा करता है तो उसे तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग आंदोलन का हिस्सा नहीं, बल्कि आंदोलन को बदनाम करने वाले हो सकते हैं।
'यह राजनीतिक दल का नहीं, युवाओं के भविष्य का आंदोलन'
राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली में जारी आंदोलन किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं की आवाज है जिन्हें रोजगार नहीं मिला, जिनकी भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और जिनका भविष्य प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या नेता पर आधारित नहीं है, बल्कि एक विचार के साथ आगे बढ़ रहा है। टिकैत ने दावा किया कि आने वाले समय में यह आंदोलन और बड़ा हो सकता है और 15 अगस्त के बाद देश के अन्य शहरों तक भी पहुंच सकता है।
'बल प्रयोग से बढ़ेगी नाराजगी, बातचीत से निकलेगा समाधान'
टिकैत ने कहा कि सरकार अगर आंदोलन को दबाने के लिए बल प्रयोग करेगी तो लोगों में नाराजगी और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का समाधान बातचीत और संवाद के जरिए ही निकाला जा सकता है।
उन्होंने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है। टिकैत के अनुसार, आंदोलन में शामिल युवा हर परिवार से जुड़े हैं और उनकी मुख्य मांग रोजगार है।
'पुलिस के डंडे में सरकार का चेहरा नजर आता है'
पुलिस कार्रवाई को लेकर राकेश टिकैत ने कहा, "पुलिस की वर्दी और डंडे में सरकार का चेहरा दिखाई देता है।" उन्होंने कहा कि पुलिस का व्यवहार संयमित और संवेदनशील होगा तो जनता सरकार को भी उसी नजर से देखेगी, लेकिन बल प्रयोग होने पर इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
आंदोलनकारियों को सुविधाएं बंद करने का लगाया आरोप
राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि आंदोलन स्थल के आसपास सार्वजनिक शौचालय, मेट्रो स्टेशन और अन्य जरूरी सुविधाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे खासकर महिला प्रदर्शनकारियों को परेशानी हो रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत करने के बजाय दबाव बनाने की नीति अपना रही है।
किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए टिकैत ने कहा कि किसानों को अपनी मांगों को लेकर 13 महीने तक आंदोलन करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अगर सरकार समय रहते युवाओं से संवाद नहीं करेगी तो असंतोष और ज्यादा बढ़ सकता है।
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