संबित पात्रा का कांग्रेस पर हमला, बोले- नेहरू के समय हुई थी देश की पहली वोट चोरी

HIGHLIGHTS
- संबित पात्रा ने कांग्रेस पर साधा निशाना, नेहरू पर वोट चोरी कर प्रधानमंत्री बनने का लगाया आरोप।
- बीजेपी सांसद ने कांग्रेस की मॉक संसद को बताया वास्तविक संसद का मजाक।
- खरगे के 13 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के दावे पर पात्रा ने उठाए सवाल।
- SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए बोले- भारत में अब तक 12 बार हो चुका है विशेष पुनरीक्षण।
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद संबित पात्रा ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर निशाना साधा। वोट चोरी के मुद्दे पर उन्होंने आरोप लगाया कि देश में पहली वोट चोरी पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय हुई थी। पात्रा के मुताबिक, सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनाने के लिए मतदान हुआ था, लेकिन उनके वोटों की चोरी कर नेहरू प्रधानमंत्री बन गए।
संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस और उसके कुछ सहयोगी दल SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को लेकर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दल लोकतंत्र का मजाक बना रहे हैं। उनके अनुसार, विपक्षी नेता वास्तविक संसद में हंगामा करते हैं और सदन की कार्यवाही नहीं चलने देते।
नेहरू पर वोट चोरी कर प्रधानमंत्री बनने का आरोप
पात्रा ने कहा कि जब मल्लिकार्जुन खरगे वोट चोरी के मुद्दे पर बोल रहे थे, तब उन्हें नेहरू के समय हुई कथित वोट चोरी की याद आई। उन्होंने आरोप लगाया कि पंडित नेहरू वोट चोरी करके प्रधानमंत्री बने थे और अब कांग्रेस पार्टी मॉक पार्लियामेंट का आयोजन कर रही है।
बीजेपी सांसद ने मल्लिकार्जुन खरगे के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने भारत में 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप लगाया था। पात्रा ने कहा कि अगर वास्तव में 13 करोड़ लोगों के वोट काटे गए होते तो वे सभी सड़कों पर उतर आते।
'कांग्रेस संसद का मजाक उड़ा रही'
संबित पात्रा ने कांग्रेस की मॉक संसद को 'नकली संसद' बताते हुए कहा कि इस तरह का आयोजन वास्तविक संसद का मजाक उड़ाने जैसा है। उन्होंने कहा कि वहां मौजूद वक्ताओं और प्रतिभागियों को SIR की प्रक्रिया के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि कई राज्यों में SIR की प्रक्रिया जारी है और 13 करोड़ लोगों के नाम अभी तक अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। पात्रा ने ASDD श्रेणी का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें 'A' का अर्थ 'Absent' यानी अनुपस्थित है।
उन्होंने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को हर व्यक्ति तक एन्यूमरेशन फॉर्म पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जाती है। BLO यह फॉर्म लेकर संबंधित व्यक्ति के घर तीन बार जाता है। यदि कोई व्यक्ति तीनों बार घर पर नहीं मिलता है तो उसे अनुपस्थित मान लिया जाता है और उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
पात्रा के अनुसार, ASDD में 'S' का मतलब 'Shifted' यानी स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना है।
'भारत में अब तक 12 बार हुई SIR प्रक्रिया'
बीजेपी सांसद ने कहा कि भारत में अब तक 12 बार SIR की प्रक्रिया हो चुकी है। उनके मुताबिक, इनमें से 10 बार यह प्रक्रिया कांग्रेस के शासनकाल में हुई थी।
उन्होंने ASDD श्रेणी में 'D' का अर्थ 'Death' यानी मृत्यु बताया। पात्रा ने कहा कि इस श्रेणी के तहत अब तक 2.8 करोड़ नाम हटाए गए हैं। उन्होंने इसे मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया बताते हुए सवाल किया कि क्या ऐसे नाम पहले ही नहीं हटाए जाने चाहिए थे।
पात्रा ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां 'घोस्ट वोटिंग' के लिए बड़ी संख्या में मृत लोगों के नामों का इस्तेमाल किया जाता था। उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी के पास अलग-अलग इलाकों, मोहल्लों और कॉलोनियों में हुई मौतों का पूरा हिसाब रहता था। उनके मुताबिक, इसके लिए सूची तैयार की जाती थी और चुनाव के दिन TMC कार्यकर्ता इन नामों पर फर्जी वोट डालते थे।
SIR के बाद फर्जी वोटिंग नहीं हो पाई: पात्रा
संबित पात्रा ने दावा किया कि इस बार SIR के कारण मृत लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए और इसी वजह से फर्जी वोटिंग नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि इसी कारण विपक्ष में हताशा दिखाई दे रही है।
पात्रा के अनुसार, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके 6 करोड़ लोगों ने आवेदन कर दोबारा पंजीकरण करा लिया है, जबकि बाकी लोग फॉर्म-6 भरकर यह प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अनुपस्थित चिह्नित किए गए लोग भी दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं। पात्रा का आरोप है कि कुछ लोग फॉर्म नहीं भर रहे हैं, जबकि उन्हें प्रक्रिया की जानकारी दी गई है और उनके घरों तक फॉर्म भी पहुंचाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग नोटिस मिलने के बावजूद उस पर ध्यान नहीं देते।
अंत में पात्रा ने दावा किया कि ऐसा करने वाले लोग घुसपैठिए हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.




























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.