शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने की काशी से गो रक्षा अभियान की शुरुआत

काशी। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को काशी में गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध के शंखनाद के साथ अभियान की शुरुआत की। उन्होंने केदारघाट पर साधु-संतों के साथ मिलकर मां गंगा की विधिवत पूजा की।
शनिवार को सुबह शंकराचार्य श्रीचिंतामणि गणेश और संकटमोचन मंदिर में पूजा करेंगे, जिसके बाद उनकी यात्रा लखनऊ की ओर शुरू होगी। चार दिनों में शंकराचार्य छह जिलों में दर्जनभर से अधिक स्थानों पर गो रक्षा के लिए सभाएं आयोजित करेंगे। यात्रा क्रम में वे जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, उन्नाव और लखीमपुर खीरी से होकर 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेंगे।
गोमाता को राज्यमाता घोषित करने की मांग
शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार से 40 दिन के भीतर गोमाता को राज्यमाता घोषित करने और प्रदेश में पूर्णतया गो हत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर 35 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।
घाट पर शंकराचार्य ने गंगा पूजन किया और छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र पर तिलक एवं पुष्प अर्पित किए। उन्होंने उपस्थित लोगों को गोरक्षा का संकल्प दिलाया और शिवाजी महाराज के गो, ब्राह्मण और मंदिरों के रक्षक होने पर शास्त्रीय दृष्टि से प्रकाश डाला।
धर्मयुद्ध और ऐतिहासिक उदाहरण
शंकराचार्य ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने 12 वर्ष की आयु में ही एक गो हत्यारे को दंडित कर गोमाता को बचाया और गो रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने की घोषणा की। उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि सनातन धर्म में राजा की जिम्मेदारी गो, ब्राह्मण और देवालय की रक्षा करना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे लोग हैं जो गाय, ब्राह्मण और मंदिरों को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में धर्मयुद्ध की आवश्यकता है और यही अभियान का आरंभ है। घाट पर कलाकारों ने शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की।
करपात्र गोभक्त सम्मान से सम्मानित
अखिल भारतीय सारस्वत परिषद ने शंकराचार्य को गोरक्षा में योगदान के लिए करपात्र गोभक्त सम्मान प्रदान किया। इस सम्मान को परिषद के गिरीश चंद्र तिवारी और प्रो. विवेकानंद तिवारी ने शंकराचार्य को प्रथम बार प्रदान किया।
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