दिल्ली एयरपोर्ट पर स्काईकास्ट लॉन्च, विमानन सुरक्षा में बड़ा कदम

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर विमानन सुरक्षा और मौसम पूर्वानुमान को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी तकनीकी पहल की गई है। शुक्रवार को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और डायल (DIAL) ने संयुक्त रूप से “स्काईकास्ट” सिस्टम का शुभारंभ किया। यह भारत का पहला एकीकृत एविएशन वेदर इंटेलिजेंस और रियल-टाइम फोरकास्ट प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है।
भारत में पहली बार ऐसी उन्नत मौसम प्रणाली
इस नई तकनीक के लागू होने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट देश का पहला ऐसा हवाई अड्डा बन गया है, जहां विमान संचालन के लिए अत्याधुनिक रीयल-टाइम वायुमंडलीय निगरानी प्रणाली सक्रिय की गई है। इससे उड़ानों की सुरक्षा और मौसम से जुड़ी सटीक जानकारी उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी।
कैसे काम करता है ‘स्काईकास्ट’ सिस्टम?
DIAL के अनुसार स्काईकास्ट कोई सामान्य मौसम उपकरण नहीं है, बल्कि कई आधुनिक तकनीकों का संयुक्त प्लेटफॉर्म है। इसमें चार प्रमुख सिस्टम शामिल हैं—
- रडार विंड प्रोफाइलर (RWP): हवा की गति और दिशा की सटीक निगरानी करता है
- माइक्रोवेव प्रोफाइलिंग रेडियोमीटर (MPR): वातावरण में तापमान और नमी का विश्लेषण करता है
- सोडार सिस्टम: ध्वनि तरंगों के जरिए हवा के पैटर्न को ट्रैक करता है
- ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन (AWS): जमीन स्तर पर मौसम की सटीक जानकारी प्रदान करता है
यह सिस्टम जमीन से लेकर लगभग 10 किलोमीटर ऊंचाई तक के वातावरण का विश्लेषण करने में सक्षम है।
खतरनाक मौसम स्थितियों की पहले से चेतावनी
यह तकनीक विमानन के लिए जोखिम पैदा करने वाली परिस्थितियों जैसे विंड शियर, घना कोहरा, आइसिंग, लो-लेवल जेट स्ट्रीम और खतरनाक बादलों की गतिविधि का पता लगाकर हर पांच मिनट में ऑटोमैटिक अलर्ट जारी करेगी। इससे उड़ानों की सुरक्षा और संचालन में काफी सुधार आने की उम्मीद है।
यात्रियों और एयरलाइंस को मिलेगा फायदा
DIAL के सीईओ विदेह कुमार जयपुरियार ने कहा कि इस प्रणाली से यात्रियों और एयरलाइंस दोनों को बड़ी राहत मिलेगी। खराब मौसम के कारण होने वाली उड़ान रद्दीकरण और डायवर्जन की स्थिति में कमी आएगी।
स्काईकास्ट के विज़ुअल सॉफ्टवेयर के जरिए मौसम वैज्ञानिकों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पायलटों को रीयल-टाइम डेटा स्क्रीन पर उपलब्ध होगा, जिससे टेक-ऑफ और लैंडिंग और अधिक सुरक्षित हो सकेंगे।
चुनिंदा वैश्विक हवाई अड्डों जैसी सुविधा
जानकारी के अनुसार इस स्तर की तकनीक अभी तक दुनिया के कुछ ही प्रमुख एयरपोर्ट और स्पेस सेंटर पर मौजूद है, जैसे हांगकांग इंटरनेशनल एयरपोर्ट, लंदन हीथ्रो, न्यूयॉर्क JFK, सिंगापुर चांगी एयरपोर्ट और नासा का केप कैनावेरल लॉन्च सेंटर। अब दिल्ली का IGI एयरपोर्ट भी इस सूची में शामिल हो गया है।
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