सुनेत्रा पवार बनीं अध्यक्ष, पार्थ-जय को मिला प्रमोशन; एनसीपी में बड़ा बदलाव

HIGHLIGHTS
- एनसीपी में संगठनात्मक पदों को लेकर उठे विवाद के बीच पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार, उनके बेटे पार्थ पवार और जय पवार ने वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे से संपर्क किया है और उनसे मुलाकात के लिए समय मांगा है।
- यह पूरा विवाद भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को भेजे गए एक पत्र के बाद सामने आया है।
- रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 अप्रैल को भेजे गए इस पत्र में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों की सूची शामिल थी, जिस पर सुनेत्रा पवार के हस्ताक्षर थे।
- इसमें उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में दर्शाया गया है,…
एनसीपी में संगठनात्मक पदों को लेकर उठे विवाद के बीच पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार, उनके बेटे पार्थ पवार और जय पवार ने वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे से संपर्क किया है और उनसे मुलाकात के लिए समय मांगा है। यह पूरा विवाद भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को भेजे गए एक पत्र के बाद सामने आया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 अप्रैल को भेजे गए इस पत्र में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों की सूची शामिल थी, जिस पर सुनेत्रा पवार के हस्ताक्षर थे। इसमें उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में दर्शाया गया है, जबकि पार्थ पवार को महासचिव और जय पवार को राष्ट्रीय सचिव के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है।
हालांकि, इसी पत्र में वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नाम उनके संगठनात्मक पदों के साथ उल्लेखित नहीं किए गए, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। केवल उन्हें राज्यसभा और लोकसभा नेता के रूप में संदर्भित किए जाने पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या उनके संगठनात्मक पदों में कोई बदलाव किया गया है।
इसी बीच, इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने के लिए जल्द ही एक बैठक होने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेता स्थिति को स्पष्ट कर सकते हैं।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनेत्रा पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि चुनाव आयोग को भेजी गई सूची में कुछ तकनीकी त्रुटियां रह गई थीं, जिन्हें जल्द ही सुधार लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी ने आयोग को 22 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची सौंपी है।
जानकारी के मुताबिक, इस सूची में छगन भुजबल और दिलीप वलसे-पाटिल जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम शामिल हैं, लेकिन उन्हें भी किसी विशेष संगठनात्मक पद के साथ नहीं जोड़ा गया है।
यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह की स्थिति सामने आई हो। इससे पहले 10 मार्च को भेजे गए पत्र में भी प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के संगठनात्मक पदों का उल्लेख नहीं किया गया था। उस समय केवल कुछ प्रमुख पदाधिकारियों के नाम और पदों का जिक्र किया गया था, जबकि अन्य वरिष्ठ नेताओं के पद सूची में शामिल नहीं थे।
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