उज्जैन में खड़े हनुमान की प्रतिमा हटाना बना चुनौती, 4 बार प्रयास नाकाम; अब होगी स्कैनिंग

HIGHLIGHTS
- प्रतिमा को हटाने के लिए अब तक चार बार किया जा चुका है प्रयास
- मंदिर के गर्भगृह और मुख्य ढांचे को पहले ही तोड़ा जा चुका है
- प्रतिमा के आधार और आसपास की मिट्टी की विशेषज्ञों से होगी स्कैनिंग
उज्जैन के अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा के विस्थापन को लेकर मंदिर के बाहर साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों का जमावड़ा आज भी जारी है। उनका कहना है कि जब भगवान हनुमान स्वयं प्रतिमा को हटाया जाना नहीं चाहते तो प्रशासन आखिर इसे विस्थापित करने का प्रयास क्यों कर रहा है। संतों का कहना है कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।
भगवान खड़े हनुमान की प्रतिमा हटाए जाने की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी मंदिर पहुंचकर दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। श्रद्धालुओं से बातचीत में उन्होंने मंदिर से जुड़े चमत्कारों के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए।
क्या बोले पुरातत्वविद् प्रो. डॉ. रमण सोलंकी
विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद् प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार, यह दुर्लभ प्रतिमा मालवा के विशेष बेसाल्ट पत्थर से बनी है। यह प्रतिमा परमार काल और राजा भोज के शासनकाल की शिल्पकला को दर्शाती है।
डॉ. सोलंकी ने बताया कि प्रशासन करीब पांच दिनों से प्रतिमा को विस्थापित करने के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिमा को यहां लॉकिंग सिस्टम के अनुसार स्थापित किया गया है। प्राचीन समय में लोहे या अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं होते थे। उस दौर के इंजीनियर पत्थरों में छेद करके न केवल प्रतिमाओं, बल्कि भव्य मंदिरों का भी निर्माण करते थे। इस तरह के मंदिर और प्रतिमाएं आज भी पूरे भारत में देखी जा सकती हैं।
पुरातत्वविद् डॉ. रमण सोलंकी ने प्रशासन को सुझाव दिया है कि प्रतिमा को विस्थापित या पुनर्स्थापित करने से पहले मध्यप्रदेश पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से परामर्श किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इन विभागों के पास प्राचीन प्रतिमाओं और मंदिरों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापना के लिए विशेषज्ञ टीमें और पर्याप्त अनुभव है। इनके मार्गदर्शन में इस तरह की प्रतिमाओं और मंदिरों को सुरक्षित और सुविधापूर्वक पुनर्स्थापित किया जा चुका है।
क्यों तोड़ा जा रहा मंदिर
दरअसल, कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण की जद में आए अति प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। पिछले कई दिनों में प्रतिमा को हटाने के लिए चार बार प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई।
मंदिर भवन के गर्भगृह और मुख्य ढांचे को तोड़ा जा चुका है। फिलहाल प्रतिमा को कैनोपी टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। मंदिर के बाहर स्थानीय श्रद्धालुओं ने चेतावनी वाला पोस्टर भी लगाया है। इसमें कहा गया है कि प्रतिमा हटाने के दौरान यदि किसी भी तरह से प्रतिमा खंडित होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
स्कैनिंग रिपोर्ट के बाद तय होगी अगली तकनीक
प्रशासन की योजना प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से टंकी चौक पर स्थापित करने की है। प्रतिमा के आधार की स्थिति जानने के लिए नीचे करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है।
अब नगर निगम और जिला प्रशासन ने बिना जल्दबाजी किए विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। आर्कियोलॉजिस्ट की टीम अत्याधुनिक मशीनों से प्रतिमा के आधार, अंदरूनी संरचना और आसपास की मिट्टी की स्कैनिंग करेगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही प्रतिमा को हटाने के लिए अगली तकनीक तय की जाएगी।
प्रतिमा हटाने के बजाय इसी स्थान पर मंदिर बनाने की मांग
मंदिर के सेवादार और पुजारी महेश पंडित (बैरागी) का कहना है कि उन्हें लगातार महसूस हो रहा है कि बाबा संकेत दे रहे हैं कि उन्हें इसी स्थान पर रहना है।
स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि ऐतिहासिक मंदिर का संबंध 1857 की क्रांति से भी पहले का है। इसलिए उनका कहना है कि मंदिर को हटाने के बजाय इसी स्थान पर भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए।
मंदिर को सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के चलते हटाया जा रहा है। इसकी वजह कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क का चौड़ीकरण किया जाना है। इसी चौड़ीकरण की जद में प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर भी आ रहा है।
अब आस्था, ऐतिहासिक विरासत और तकनीकी जटिलताओं के बीच सभी की निगाहें पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच और स्कैनिंग रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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