यूपी के किसानों की उपज अब विदेशों में होगी सप्लाई, निर्यात बढ़ाने के लिए बोर्ड की वेबसाइट लॉन्च

HIGHLIGHTS
- प्रदेश के सभी 75 जिलों से किसान, निर्यातक और एफपीओ कार्यशाला में शामिल हुए।
- यूपी में करीब 3,000 निर्यातक तैयार हो चुके हैं।
- वर्ष 2016-17 में 727 करोड़ रुपये का कृषि-औद्यानिक निर्यात 2025-26 में बढ़कर 1,132 करोड़ रुपये हो गया।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के किसानों की उपज को स्थानीय और राष्ट्रीय बाजार से आगे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को उद्यान भवन के सभागार में उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की दूसरी बैठक और कार्यशाला आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता उद्यान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने की। इस दौरान बोर्ड की वेबसाइट upsheb.in का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही निर्यातकों और एफपीओ के बीच एमओयू भी हुआ।
कार्यक्रम में प्रदेश के सभी 75 जिलों से प्रगतिशील किसान, निर्यातक, एफपीओ, उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड किसानों की उपज को सात समंदर पार के बाजारों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
उन्होंने बताया कि वेबसाइट के जरिये किसानों और निर्यातकों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनके जिले में उपलब्ध अतिरिक्त उपज को किस देश के बाजार में भेजा जा सकता है। इसके अलावा संबंधित देश में उत्पाद के लिए जरूरी मानक, निर्यात प्रक्रिया और सरकार व बोर्ड की ओर से मिलने वाली सुविधाओं, मार्गदर्शन और अनुदान की जानकारी भी वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।
तीन हजार निर्यातक तैयार
मंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश के निर्यातक मुख्य रूप से बड़े शहरों तक ही सीमित थे, लेकिन अब सभी 75 जिलों में निर्यातक सक्रिय हैं। प्रदेश में करीब 3,000 निर्यातक तैयार हो चुके हैं, जो किसानों की उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश से औद्यानिक और कृषि आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2016-17 में 727 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर 1,132 करोड़ रुपये हो गया। प्रदेश के कृषि और औद्यानिक उत्पाद अमेरिका, यूएई, जर्मनी, सऊदी अरब, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और स्वीडन समेत कई देशों में पहुंच रहे हैं।
गुणवत्ता और मानकों पर जोर
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए प्रदेश की उपज गुणवत्तापूर्ण होने के साथ-साथ संबंधित देशों के निर्धारित मानकों को भी पूरा करनी चाहिए। जेवर एयरपोर्ट के तैयार होने के बाद कृषि उत्पादों को हवाई कार्गो के माध्यम से विदेश भेजने की संभावनाएं बढ़ेंगी। जेवर के पास इंटीग्रेटेड टेस्टिंग ट्रीटमेंट पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार परीक्षण, प्रमाणन और पैकेजिंग की सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
आलू किसानों के लिए 1000 करोड़ का भाव स्थिरता कोष
मंत्री ने बताया कि आलू के बाजार भाव में उतार-चढ़ाव से किसानों को राहत देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये के भामाशाह भाव स्थिरता कोष का प्रावधान किया गया है। शीतगृह में भंडारित आलू के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल शीतगृह किराये पर अनुदान और प्रमाणित आलू बीज की बिक्री दर में 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की छूट की व्यवस्था है। बेहतर आलू कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने के लिए भी अनुदान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के संकल्प को पूरा करने में उद्यान विभाग और राज्य औद्यानिक निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका है। किसानों को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने, निर्यातकों को प्रोत्साहित करने और कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन बढ़ाने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यशाला में एपीडा के उप महाप्रबन्धक डॉ. सीबी सिंह, कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार, लखनऊ के सहायक निदेशक संजय सिंह, एफआईईओ कानपुर के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव, सुधांशु सिंह, क्षेत्रीय निदेशक सी-सार्क, आगरा, उद्यान विभाग के अपर मुख्य सचिव उद्यान बीएल मीणा, निदेशक भानु प्रकाश राम, उप महाप्रबंधक एपीडा सीबी सिंह, उपनिदेशक मंडी रामजी मिश्रा, अध्यक्ष कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन तृप्ति सिंह आदि उपस्थित रहे।
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