क्या बांग्लादेश में फिर बदलेगा राजनीतिक समीकरण? राष्ट्रपति के इस्तीफे की अटकलें तेज

HIGHLIGHTS
- बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के जल्द इस्तीफा देने की चर्चाएं तेज, कार्यकाल अभी करीब दो साल बाकी।
- शेख हसीना की संभावित वापसी और राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति पद को लेकर बढ़ी हलचल।
- राष्ट्रपति के संभावित इस्तीफे से बांग्लादेश के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना।
बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक सूत्रों के हवाले से खबर है कि राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन जल्द ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि उनका कार्यकाल अभी करीब दो साल बाकी है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनके इस्तीफे को लेकर चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं। अगर राष्ट्रपति पद छोड़ते हैं तो यह ऐसे समय में होगा, जब बांग्लादेश पहले ही शेख हसीना सरकार के पतन, नई सरकार के गठन और उनकी संभावित वापसी की घोषणा के चलते संवेदनशील राजनीतिक दौर से गुजर रहा है।
मोहम्मद शहाबुद्दीन को अप्रैल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति चुना गया था। जुलाई-अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। इसके बाद 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना भारत आ गई थीं और तभी से भारत में रह रही हैं। उस राजनीतिक बदलाव के बाद भी शहाबुद्दीन अपने संवैधानिक पद पर बने रहने वाले शीर्ष नेताओं में शामिल हैं।
अब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक वरिष्ठ नेता ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति जल्द इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि उन्होंने इसके पीछे की वजह सार्वजनिक नहीं की है।
राष्ट्रपति के इस्तीफे की चर्चाओं ने क्यों पकड़ा जोर?
पिछले दो दिनों से बांग्लादेशी मीडिया में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे को लेकर खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार अब राष्ट्रपति के साथ सहज महसूस नहीं कर रही है।
अखबार प्रोथोम आलो ने एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र के हवाले से दावा किया है कि सरकार इस बात से नाराज है कि राष्ट्रपति ने हाल में शेख हसीना से दोबारा संपर्क करने की कोशिश की। वहीं, द डेली स्टार से बातचीत में बीएनपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राष्ट्रपति और शेख हसीना के बीच कथित फोन बातचीत ही इस्तीफे की एकमात्र वजह नहीं है।
उन्होंने कहा कि मामला इससे ज्यादा जटिल है, क्योंकि शेख हसीना की दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की घोषणा के बाद देश का राजनीतिक माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है।
शेख हसीना की वापसी और अदालती फैसले का असर
इस महीने की शुरुआत में शेख हसीना ने घोषणा की थी कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी। बांग्लादेश सरकार ने उनकी वापसी की योजना का स्वागत किया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें कानून का सामना करना होगा।
17 नवंबर 2025 को बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी-बीडी) ने जुलाई आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों में कथित भूमिका को लेकर अनुपस्थिति में सुनवाई की थी। इस मामले में शेख हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को मौत की सजा सुनाई गई थी।
वर्तमान अंतरिम व्यवस्था के दौरान आईसीटी-बीडी कानून में बदलाव किया गया, जिसके बाद अवामी लीग सरकार के नेताओं और अधिकारियों पर भी मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों में मुकदमा चलाने का रास्ता खुला।
क्या फिर बदल सकता है बांग्लादेश का राजनीतिक समीकरण?
राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के संभावित इस्तीफे, शेख हसीना की प्रस्तावित वापसी और उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई ने बांग्लादेश की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अगर राष्ट्रपति वास्तव में पद छोड़ते हैं तो इसका असर देश के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
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