सरकारी अस्पताल में कांवड़िए से 30 हजार मांगने का आरोप, इलाज को लेकर बवाल

मुजफ्फरनगर। हरिद्वार से गंगाजल की 51 लीटर कलश कांवड़ लेकर लौट रहे एक शिवभक्त ने जिला चिकित्सालय में इलाज के दौरान पैसों की मांग और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। पीड़ित कांवड़िया बागपत जिले का निवासी है। मामले की जानकारी मिलते ही शिवसेना कार्यकर्ता भी अस्पताल पहुंच गए और नाराजगी जताई।
बागपत के गांव टिकरी निवासी विकास मेहरा, जो गो रक्षक दल के जिलाध्यक्ष हैं, 25 जनवरी को हरिद्वार से कांवड़ यात्रा पर निकले थे। उनका कहना है कि गोमाता को राष्ट्र माता घोषित किए जाने की कामना के साथ वह गंगाजल लेकर आ रहे थे। बहादराबाद क्षेत्र में बारिश के दौरान फिसलने से उनका पैर और रीढ़ की हड्डी चोटिल हो गई। हादसे के बाद उन्हें जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।
विकास का आरोप है कि जांच के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जरूरत बताई और इसके लिए 30 हजार रुपये की मांग की गई। उन्होंने यह भी कहा कि भर्ती रहने के दौरान उनकी समुचित देखभाल नहीं की गई। गुरुवार को जब वह अस्पताल से जाने लगे, तो सुरक्षा कर्मियों ने उनके साथ अभद्रता की और बात बढ़ गई।
घटना की सूचना मिलने पर शिवसेना के जिलाध्यक्ष लोकेश सैनी कार्यकर्ताओं के साथ अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया से फोन पर बात की और सीएमएस डॉ. संजय वर्मा से मिलकर शिकायत दर्ज कराई। शिवसेना नेताओं ने आरोपों की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
विकास मेहरा का कहना है कि वह फिलहाल शाहपुर से पट्टी कराकर लौटे हैं और रात ट्रैक्टर-ट्रॉली में ही गुजारेंगे। मौके पर शिवसेना युवा जिलाध्यक्ष शैंकी शर्मा सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सीएमएस डॉ. संजय कुमार वर्मा ने कहा कि किसी भी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी ने इलाज के नाम पर पैसे नहीं मांगे। उनके अनुसार, सुरक्षा कर्मियों से विवाद बीड़ी पीने से रोकने को लेकर हुआ था। बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन कांवड़िया स्वयं अस्पताल छोड़कर चले गए।
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