उत्तराखंड में मान्यता नहीं लेने वाले मदरसों पर कार्रवाई, दो सील और एक को नोटिस

HIGHLIGHTS
- राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से लागू है।
- प्रदेश के कई मदरसों ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है।
- मानकों का पालन नहीं करने वाले मदरसों का निरीक्षण किया जाएगा।
उत्तराखंड में मान्यता नहीं लेने वाले मदरसों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, सोमवार को रुद्रपुर में एक मदरसे को सील करने के बाद मंगलवार को एक और मदरसे को सील किया गया। वहीं, एक अन्य मदरसे को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि तय मानकों को पूरा नहीं करने वाले मदरसों का निरीक्षण कर प्रदेशभर में इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण के अध्यक्ष के मुताबिक, उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड की व्यवस्था समाप्त हो चुकी है। 1 जुलाई 2026 से राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की नई व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी धार्मिक पहचान से जोड़े रखते हुए उन्हें आधुनिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। हालांकि, सामने आया है कि राज्य के कई मदरसे न तो मान्यता ले रहे हैं और न ही इसके लिए आवेदन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराना है। यह कार्रवाई संस्थानों को बंद करने के बजाय व्यवस्था में सुधार और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने पर केंद्रित है। सभी मदरसों को तय समय में मानकों को पूरा कर शिक्षा विभाग से मान्यता लेने के लिए कहा गया है।
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