अखिलेश का बड़ा बयान: मुझसे गलती हुई, रामभद्राचार्य को जेल भेजना चाहिए था

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े प्रकरण में दर्ज मुकदमे को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शाकुंभरी पीठाधीश्वर के आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा कराई गई एफआईआर को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए कहा कि सरकार दो दशक पुरानी घटना को उठाकर साधु-संतों को अपमानित करने का प्रयास कर रही है।
पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की मौजूदा सरकार संत समाज के सम्मान को ठेस पहुंचा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब सरकार से नाराज है और बदलाव का इंतजार कर रही है।
सुरक्षा में कटौती के मुद्दे पर सपा अध्यक्ष ने कहा कि उनके सुरक्षा दस्ते में सामान्य कर्मचारियों को भी गिनकर संख्या बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व में उनके और दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव के सरकारी आवास को लेकर भी विवाद हुआ था। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने और आवास विवाद का भी उल्लेख किया।
धार्मिक मुद्दों पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि केवल बाहरी वेशभूषा या प्रतीकों से कोई योगी नहीं बन जाता। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों और संतों के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि आध्यात्मिकता आचरण से सिद्ध होती है, न कि दिखावे से। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ घटनाओं के समय भाजपा के नेता मौन रहे, जबकि अब राजनीतिक लाभ के लिए विवाद खड़े किए जा रहे हैं।
विकास के मुद्दे पर सपा प्रमुख ने प्रदेश सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि नदियों की सफाई और बुनियादी ढांचे के कामों में ठोस प्रगति नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में गंभीर नहीं है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच अखिलेश यादव ने एक बार फिर भाजपा के नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई 100 विधायक लेकर आए, तो सपा उसे मुख्यमंत्री पद के लिए समर्थन देने को तैयार है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि यह प्रस्ताव सीमित समय के लिए है।
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