अंबाला में ‘लखपति भिखारी’ का खुलासा, ट्राइसाइकिल से मिले लाखों रुपये

अंबाला। रेलवे रोड के हनुमान मंदिर और रामबाग रोड के शिव मंदिर के पास पिछले 10-12 वर्षों से ट्राइसाइकिल पर बैठे रहने वाले एक बुजुर्ग ने शहर को हैरान कर दिया। लोग उन्हें सामान्य भिखारी समझकर सिक्के डालते, हाथ में कटोरा लिए और आंखों में थकान लिए वह रोजी-रोटी चलाते।
लेकिन जब उनका निधन हुआ, तो सामने आया कि यह साधारण भिखारी नहीं बल्कि बैंक खातों में लाखों रुपये जमा करने वाला लखपति था।
ट्राइसाइकिल और ट्रंक से मिले नोट और पासबुक
लेखराज, पुत्र रिहारदेव के पीछे बंधे लोहे के ट्रंक की जांच में बड़ी रकम मिली। ट्रंक से दो नोटों की गड्डियां मिलीं – एक में 50,000 रुपये और दूसरी में 16,120 रुपये। साथ ही दो पासबुकें भी मिलीं: पंजाब नेशनल बैंक, राजपुरा शाखा में 3.32 लाख रुपये और बैंक ऑफ इंडिया, अंबाला में 434 रुपये जमा थे।
सामाजिक संगठन ने कराया अंतिम संस्कार
नौ फरवरी को हालत बिगड़ने पर किसी ने स्थानीय संगठन वंदेमातरम दल को सूचना दी। टीम ने लेखराज को सड़क से उठाकर जिला नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया। तीन दिन तक इलाज के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। शव को तीन दिन तक मोर्चरी में रखा गया, लेकिन कोई परिजन नहीं आया। अंततः महाशिवरात्रि के दिन वंदेमातरम दल ने उनका अंतिम संस्कार किया।
कैसे खुला लखपति भिखारी का राज
पुलिस ने ट्राइसाइकिल के पीछे बंधे ट्रंक को खोला तो उसके अंदर कंबल, छाता, दो जोड़ी कपड़े, हवा भरने का पंप और नोटों की गड्डियां मिलीं। जांच में पता चला कि नोट अक्टूबर में बैंक ऑफ इंडिया से निकाले गए थे। दस्तावेजों से मृतक की पहचान लेखराज, पुत्र रिहारदेव के रूप में हुई।
राजपुरा स्थित पंजाब नेशनल बैंक खाते में 3.32 लाख रुपये थे, जबकि अंबाला के बैंक ऑफ इंडिया खाते में केवल 434 रुपये शेष थे। दोनों खातों में कोई नामिनी दर्ज नहीं थी।
अनसुलझे सवाल और रहस्य
ट्रंक में अभी भी कई दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें खंगाला जाना बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि उसके अन्य बैंक खाते भी हो सकते हैं। सवाल यह है कि जब लेखराज के पास लाखों रुपये थे, तो उन्होंने यह कठिन जीवन क्यों चुना।
शहरवासियों के लिए यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस विडंबना की भी कहानी है जिसमें जमा पूंजी बढ़ती रही, लेकिन जीवन में अकेलापन और कठिनाइयां बनी रहीं। कानूनी प्रक्रिया के तहत अब उनके बैंक खातों और संभावित संपत्ति पर उत्तराधिकार का मामला उठेगा; यदि कोई वारिस सामने नहीं आता है, तो संपत्ति सरकारी प्रक्रिया के तहत जाएगी।
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