विदेशी नागरिकों के निर्वासन पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में जवाब, राष्ट्रीयता सत्यापन जरूरी

HIGHLIGHTS
- गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में निर्वासन की प्रक्रिया स्पष्ट की।
- संबंधित देश की स्वीकृति और यात्रा दस्तावेज मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।
- केंद्र ने कहा कि बिना पहचान सत्यापन के निर्वासन की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि जिन विदेशी नागरिकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि नहीं हुई है, उन्हें उनके देश में तब तक निर्वासित नहीं किया जा सकता, जब तक संबंधित देश उनकी पहचान की पुष्टि कर उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार न हो।
गृह मंत्रालय ने यह जानकारी शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में दी है। यह हलफनामा उस याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है, जिसमें असम में विदेशी घोषित किए गए ऐसे लोगों को अनिश्चित समय तक हिरासत में रखने के फैसले को चुनौती दी गई है, जिनके निर्वासन की कोई संभावना नहीं है।
केंद्र सरकार ने हलफनामे में कहा, "जिस विदेशी नागरिक की राष्ट्रीयता अज्ञात या सत्यापित नहीं है, उसे उसके मूल देश में तभी भेजा जा सकता है, जब उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि हो जाए, उसके पास वैध यात्रा दस्तावेज हों या संबंधित देश उसे स्वीकार करने के लिए सहमत हो। राष्ट्रीयता का सत्यापन किए बिना निर्वासन की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती।"
निर्वासन के लिए जरूरी दस्तावेज कौन से हैं?
केंद्र सरकार के अनुसार, किसी विदेशी नागरिक को संबंधित राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश या विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) तभी निर्वासित कर सकता है, जब उसकी सजा पूरी हो चुकी हो या अदालत की कार्यवाही समाप्त हो गई हो।
इसके साथ ही संबंधित व्यक्ति के पास वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज होना जरूरी है और उसके खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला लंबित नहीं होना चाहिए।
दूतावास से लेना होगा यात्रा दस्तावेज
गृह मंत्रालय ने बताया कि निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करने से पहले संबंधित देश के दूतावास या उच्चायोग के माध्यम से विदेशी नागरिक की राष्ट्रीयता का सत्यापन कराया जाना आवश्यक है।
हलफनामे में कहा गया है कि राष्ट्रीयता की पुष्टि की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित देश के दूतावास या उच्चायोग से जरूरी यात्रा दस्तावेज प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके बाद ही निर्वासन की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।
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