SIR विवाद के बीच बढ़ा कन्फ्यूजन, उपेंद्र कुशवाहा बोले- मतभेद होना स्वाभाविक

HIGHLIGHTS
- SIR को लेकर आम लोगों के बीच भी कई सवाल उठे हैं।
- रिपोर्ट में करीब 10 महीने की अवधि का उल्लेख किया गया है।
- ERONET डेटाबेस के केंद्रीकरण का मुद्दा सामने आया।
पटना। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक चर्चा के साथ आम लोगों के बीच भी सवाल खड़े कर रहा है। प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से आपत्तियां उठाए जाने की रिपोर्ट सामने आने के बाद SIR को लेकर बहस और तेज हो गई है।
इसी बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि किसी भी मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन इस मामले में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच का अधिकार जिन लोगों के पास है, उन्हें ही इसकी पड़ताल करनी चाहिए।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद बढ़ी चर्चा
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि के दौरान कई अवसरों पर प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
रिपोर्ट में ERONET डेटाबेस के केंद्रीकरण, Form 6 में बदलाव और SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने से संबंधित फैसलों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष की ओर से जवाबदेही तय करने और प्रक्रिया की समीक्षा की मांग भी तेज हुई है।
चुनाव आयोग ने कहा- अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए
विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि बहुसदस्यीय आयोग में तकनीकी नोट और सवाल उठना सामान्य विचार-विमर्श का हिस्सा है।
आयोग के मुताबिक SIR सहित सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ऐसे में एक ओर रिपोर्ट में आंतरिक आपत्तियों का उल्लेख है, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग अंतिम फैसलों को सर्वसम्मत बता रहा है।
SIR को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी
SIR मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया है और इससे संबंधित किसी भी विवाद का असर मतदाताओं के भरोसे पर पड़ सकता है। अलग-अलग दावों और प्रतिक्रियाओं के बीच आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति भी बन सकती है।
ऐसे में चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया, उठाई गई आपत्तियों और अंतिम फैसलों से संबंधित स्पष्ट और तथ्यात्मक जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
कुशवाहा बोले- मतभेद होने पर अधिकृत स्तर पर हो जांच
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि किसी मुद्दे पर राजनीतिक दलों की राय अलग हो सकती है, लेकिन सवाल उचित प्रक्रिया के तहत ही उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि संबंधित विषय को सक्षम प्राधिकरण के स्तर पर देखा जाना चाहिए।
SIR पर उठे सवालों के बीच स्पष्टीकरण की जरूरत
फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक बयान और चुनाव आयोग की ओर से दी गई सफाई दोनों सामने हैं। ऐसे में लोगों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि वास्तविक प्रक्रिया क्या रही, किन मुद्दों पर आपत्तियां उठाई गईं और अंतिम निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिए गए।
इन पहलुओं पर चुनाव आयोग की ओर से विस्तृत और स्पष्ट जानकारी मिलने से मौजूदा भ्रम को कम करने में मदद मिल सकती है।
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