बंगाल में शुरू हुई देश की पहली डिजिटल जनगणना, सीएम ने खुद भरा ऑनलाइन फॉर्म

HIGHLIGHTS
- बंगाल में डिजिटल जनगणना प्रक्रिया-2027 का पहला चरण शुरू हुआ।
- पहली बार नागरिकों को ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा दी गई है।
- 16 अगस्त से 15 सितंबर तक जनगणना कर्मी घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे।
कोलकाता में देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना का पहला चरण शनिवार को शुरू हुआ। बंगाल में यह प्रक्रिया कई महीने की देरी के बाद शुरू की गई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के साल्टलेक स्थित सिंचाई विभाग के बंगले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में खुद ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन फॉर्म भरकर राज्य में जनगणना प्रक्रिया-2027 का शुभारंभ किया।
इस बार जनगणना में पहली बार नागरिकों को ऑनलाइन माध्यम से स्वयं और अपने परिवार की जानकारी भरने यानी ‘स्व-गणना’ (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प दिया गया है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना के दौरान नागरिकों की ओर से दी जाने वाली सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रहेंगी और कानून के तहत सुरक्षित रखी जाएंगी। इन जानकारियों का इस्तेमाल केवल सांख्यिकीय विश्लेषण, योजना तैयार करने और विकास कार्यों के लिए किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत जानकारी का न तो सार्वजनिक किया जाएगा और न ही इसका गलत इस्तेमाल किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार की जनगणना दो वजहों से ऐतिहासिक है। पहली बार यह पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जा रही है और पहली बार लोगों को ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों से अपील की कि वे एक से 15 अगस्त के बीच इस सुविधा का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें और जनगणना कर्मियों का सहयोग करें।
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन प्रक्रिया में कुल 34 सवालों के जवाब देने होंगे। इनमें व्यक्तिगत पहचान, परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार, आवास और अन्य सामाजिक-आर्थिक जानकारियां शामिल होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार पहली बार जाति आधारित आंकड़े भी एकत्र किए जा रहे हैं, जिससे पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और स्थायी आंकड़े तैयार करने में मदद मिलेगी।
16 अगस्त से शुरू होगा घर-घर सत्यापन
मुख्यमंत्री ने बताया कि 15 अगस्त को सेल्फ एन्यूमरेशन की अवधि पूरी होने के बाद 16 अगस्त से 15 सितंबर तक जनगणना कर्मी घर-घर जाकर ऑनलाइन भरी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे। जरूरत पड़ने पर लोगों को अपनी जानकारी में बदलाव करने का मौका भी दिया जाएगा।
जनगणना कर्मियों को एक विशेष मोबाइल एप उपलब्ध कराया गया है, जिसके माध्यम से सभी आंकड़े सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपलोड किए जाएंगे। इससे प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और सटीक बनाने के साथ ही कागज के इस्तेमाल को कम करने का दावा किया गया है।
एसआईआर सूची को लेकर सीएम ने दी जानकारी
एसआईआर सूची से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के बाद करीब 27 लाख नाम विचाराधीन थे। इनमें से कुछ नाम बहाल किए गए हैं, जबकि सात लाख लोगों ने न्यायाधिकरण में अपील की है। वहीं, करीब 20 लाख मामलों में कोई जवाब नहीं मिला है।
अवैध घुसपैठियों पर कानून के अनुसार होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने अवैध घुसपैठियों और शरणार्थियों के बीच अंतर बताते हुए कहा कि अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और उन्हें वापस भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के दायरे में आने वाले हिंदू, सिख, जैन और पारसी शरणार्थियों को कानून के अनुसार संरक्षण मिलेगा। मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर समय रहते जनगणना की तैयारियां नहीं करने का भी आरोप लगाया।
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