सोनम वांगचुक मामले में दिल्ली HC की सुनवाई, परिवार को देनी होगी मेडिकल रिपोर्ट

HIGHLIGHTS
- सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।
- कोर्ट ने वांगचुक की सभी मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट परिवार के साथ साझा करने के निर्देश दिए।
- याचिकाकर्ता ने जबरन अस्पताल ले जाने और इलाज का आरोप लगाया, जबकि केंद्र ने सार्वजनिक सुरक्षा का हवाला दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो की ओर से दाखिल याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और स्टैंडिंग काउंसिल आशीष दीक्षित ने पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने दलीलें पेश कीं।
वांगचुक को अस्पताल ले जाने और रिपोर्ट नहीं देने का आरोप
सुनवाई के दौरान अखिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि 17 जुलाई तक सोनम वांगचुक का पोटेशियम स्तर सामान्य सीमा में था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि परिवार की सहमति के बिना वांगचुक को जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया और उनकी जांच रिपोर्ट परिजनों को उपलब्ध नहीं कराई गई।
उन्होंने कहा कि मांग किए जाने के बावजूद मेडिकल रिपोर्ट डिजिटल या फिजिकल माध्यम से देने से इनकार किया गया। इस पर हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि वांगचुक के सभी मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट उनके परिवार के साथ साझा की जाएगी, हालांकि अदालत विशेषज्ञों की राय पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती।
अस्पताल बदलने की मांग और जबरन इलाज का आरोप
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक फिलहाल आईसीयू में नहीं हैं, वह पूरी तरह होश में हैं और पत्र भी लिख रहे हैं। उन्होंने मांग की कि वांगचुक को उनकी इच्छा के अनुसार अस्पताल में जाने की अनुमति दी जाए, जिसमें मेदांता जैसे अस्पताल का विकल्प शामिल है।
वकील ने आरोप लगाया कि वांगचुक की इच्छा के बिना डॉक्टरों द्वारा जबरन मेडिकल हस्तक्षेप किया गया।
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा का दिया हवाला
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को इलाज चुनने या मना करने का अधिकार होता है। लेकिन अगर किसी विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति के कदम से अन्य लोगों की जान पर खतरा पैदा होने की आशंका हो, तो यह अधिकार लागू नहीं रहता।
उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति प्रदर्शन स्थल पर अपनी जान जोखिम में डाल रहा है और उससे व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध कराने के दिए निर्देश
सुनवाई के दौरान पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से सोनम वांगचुक की मौजूदा स्वास्थ्य रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने को कहा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सफदरजंग और एम्स अस्पतालों की लैब में कराई गई सभी पैथोलॉजी रिपोर्ट याचिकाकर्ता को तुरंत उपलब्ध कराई जाएं।
अदालत ने एम्स निदेशक और वांगचुक का इलाज कर रही टीम के प्रमुख डॉ. अक्षय कल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई कल होगी।
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