राज्यसभा टिकट से चूके हरदीप पुरी और बीएल वर्मा, केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव के संकेत

HIGHLIGHTS
- हरदीप पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होगा।
- पिछले चार महीनों में मंत्रिमंडल में पांच मंत्री कम होने की बात कही गई है।
- पंकज चौधरी को यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद फेरबदल की चर्चा तेज हुई।
नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री बीएल वर्मा को राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। दोनों नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। ऐसे में इसके बाद उनके मंत्रिमंडल में बने रहने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
इन दोनों को मिलाकर पिछले चार महीनों में मंत्रिमंडल में पांच मंत्री कम हो जाएंगे। भाजपा संगठन में नियुक्तियों और राज्यसभा टिकट वितरण के तरीके पर नजर डालें तो माना जा रहा है कि संभावित फेरबदल में संगठन से जुड़े युवा नेताओं को प्राथमिकता मिल सकती है।
हरदीप पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल होगा समाप्त
दरअसल, जून महीने में रवनीति बिट्टू और जार्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल जुलाई के पहले सप्ताह में समाप्त हो गया था। इसके बाद दोनों को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं, जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के चलते धर्मेंद्र प्रधान भी मंत्रिमंडल से बाहर हो गए थे।
केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन को देखते हुए फेरबदल को टाल दिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, अकाली दल के साथ गठबंधन होने की स्थिति में उसे भी मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि अकाली दल के साथ गठबंधन की घोषणा जल्द हो सकती है और फिलहाल सीटों के बंटवारे को लेकर मामला अटका हुआ है। गठबंधन की घोषणा के बाद मंत्रिमंडल विस्तार कभी भी किया जा सकता है।
युवा और महिला चेहरों को मिल सकती है जगह
माना जा रहा है कि मोदी सरकार 3.0 में यह पहला और आखिरी मंत्रिमंडल फेरबदल हो सकता है। 2029 के लोकसभा चुनाव में सरकार इसी मंत्रिमंडल के साथ चुनाव मैदान में उतर सकती है। यही वजह है कि फेरबदल से पहले सभी समीकरणों और अपेक्षाओं को ध्यान में रखा जा रहा है।
एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, जिस तरह पार्टी संगठन में पदाधिकारियों की नियुक्ति से लेकर राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन तक संगठन से जुड़े जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है, उसी तरह की तस्वीर मंत्रिमंडल फेरबदल में भी देखने को मिल सकती है।
2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण के महत्वपूर्ण मुद्दा बनने की संभावना को देखते हुए मंत्रिमंडल में महिलाओं की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा युवाओं के साथ जुड़ाव बढ़ाने की कोशिश में जुटी सरकार युवा चेहरों को भी प्राथमिकता दे सकती है।
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