प्रभु भक्ति और परमार्थ ही भागवत का मूल संदेश: स्वामी ओमानंद

मुजफ्फरनगर। भागवत पीठ, श्री शुकदेव आश्रम के डोंगरे जी भागवत भवन में अखिल भारतीय ललिताम्बा शक्ति समिति के भक्तों द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने दीप प्रज्ज्वलन से की।
श्री ओमानंद महाराज ने पोथी पूजन के अवसर पर ललिताम्बा पीठ हरिद्वार के पीठाधीश्वर स्वामी जयराम देवाचार्य महाराज का व्यासपीठ पर सम्मान भी किया। इससे पहले तीर्थनगरी में श्रद्धालुओं ने बैंड-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली, जिसमें स्थानीय और दूर-दूर से आए भक्तों ने भाग लिया।
श्री ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य हिस्सा है, जो न केवल मनुष्य में कर्तव्यबोध जागृत करता है बल्कि संस्कृति और धर्म की जड़ को भी मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि किसी राष्ट्र की पहचान और अस्तित्व धर्म, संस्कृति, सभ्यता और इतिहास के संरक्षण पर निर्भर करता है, और भागवत इस संरक्षण का प्रमुख आधार है।
इस अवसर पर स्वामी जयराम देवाचार्य महाराज ने शुकतीर्थ को पुण्यभूमि, मुक्तितीर्थ और मुक्ति धाम बताया। उन्होंने कहा कि इसी भूमि पर श्रीमद् भागवत प्रकट हुई थी, जिसने राजा परीक्षित को मुक्ति प्रदान की।
कार्यक्रम में यज्ञमान अशोक शर्मा, सुभाष शर्मा, विजेंद्र शर्मा, श्याम लाल शर्मा ने वेद मंत्रोच्चार के साथ संतों और पुरोहितों का सम्मान किया। कलश यात्रा में मुकेश शर्मा, सतीश शर्मा, वीरेंद्र शर्मा, कन्हैया शर्मा, शाकुंबर प्रसाद, अनुज मुद्गल सहित अन्य श्रद्धालु शामिल हुए।
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