'राज्य के दर्जे के बिना काम नहीं तो सत्ता में क्यों'? CM उमर पर BJP का हमला

HIGHLIGHTS
- नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने सरकार से अधिकारों को लेकर सवाल किए।
- उन्होंने पानी की पाइपलाइन और बिजली के पोल लगाने जैसे कामों का मुद्दा उठाया।
- स्कूलों में स्टाफ और अस्पतालों में डॉक्टरों की व्यवस्था पर भी सवाल किए गए।
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के आगामी सत्र से पहले प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। विपक्षी भाजपा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार को चुनावी वादों, शासन व्यवस्था और जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर घेरने की तैयारी शुरू कर दी है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पानी, बिजली, सड़क, स्कूल, अस्पताल और रोजगार जैसे बुनियादी कार्यों के लिए भी सरकार अधिकारों की कमी का हवाला देती है, तो फिर सरकार में बने रहने का क्या मतलब है?
श्रीनगर में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान शर्मा ने आरोप लगाया कि लोग अपनी रोजमर्रा की समस्याएं लेकर सरकार के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन कई मामलों में उन्हें यह जवाब दिया जाता है कि सरकार के पास पर्याप्त अधिकार नहीं हैं।
उन्होंने सवाल किया कि पानी की पाइपलाइन जोड़ने, बिजली के पोल और तार लगाने, स्कूलों में कर्मचारियों की नियुक्ति, अस्पतालों में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था करने या सड़कों के गड्ढे भरने जैसे कामों के लिए क्या राज्य का दर्जा जरूरी है?
स्टेटहुड के मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप
शर्मा ने कहा कि चुनी हुई सरकार को लगभग दो साल पूरे हो चुके हैं और अब जनता के सामने शासन की कार्यप्रणाली तथा समस्याओं के समाधान को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्टेटहुड के मुद्दे के जरिए रोजमर्रा के प्रशासनिक सवालों से जनता का ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है।
हालांकि, जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करना एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है और सत्ता पक्ष इसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मांग के रूप में उठाता रहा है।
भाजपा ने संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा सत्र में सरकार से जनता से किए गए हर वादे पर जवाब मांगा जाएगा। पार्टी के अनुसार, चुनाव के दौरान की गई घोषणाओं की प्रगति, उनके क्रियान्वयन की स्थिति और सरकार के अब तक के कामकाज को सदन में स्पष्ट किया जाना चाहिए।
विपक्ष की ओर से बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और भर्ती जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी है।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सरकार से सवाल
रोजगार के मुद्दे पर भी सुनील शर्मा ने सरकार को घेरा। उन्होंने 19 से 29 वर्ष के युवाओं के सामने मौजूद आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार से जवाब मांगने के संकेत दिए।
आउटसोर्सिंग को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाया। करीब 25 हजार पदों को आउटसोर्स किए जाने का दावा करते हुए शर्मा ने पूछा कि क्या इन पदों को दोबारा पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया के तहत लाया जाएगा।
शर्मा ने सरकार पर सत्ता और विपक्ष, दोनों की भूमिका निभाने का आरोप भी लगाया। भाजपा का कहना है कि विधानसभा सत्र जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करने का महत्वपूर्ण मंच होगा।
विधानसभा सत्र से पहले जम्मू-कश्मीर की राजनीति में स्टेटहुड और रोजमर्रा के शासन के मुद्दे आमने-सामने हैं। सरकार जहां अपने अधिकारों और राज्य के दर्जे से जुड़े सवालों को अहम मानती है, वहीं भाजपा बुनियादी सेवाओं और चुनावी वादों को लेकर तत्काल जवाबदेही की मांग कर रही है। आगामी सत्र में इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस होने के आसार हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.


























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.