चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर किसानों की महापंचायत, मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी

HIGHLIGHTS
- किसानों ने लंबे समय से लंबित मांगों पर ठोस फैसला लेने की बात कही।
- किसान नेताओं ने बार-बार दिए जा रहे आश्वासनों पर नाराजगी जताई।
- किसानों ने खुद को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया।
चंडीगढ़। चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर बुधवार को आयोजित किसानों की महापंचायत में पंजाब के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कहा कि उनका हक उन्हें हर हाल में मिलना चाहिए। महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा कमेटी के किसान नेता मंजीत सिंह धनेर समेत अन्य किसान नेताओं ने हिस्सा लिया।
किसानों ने एकजुटता दिखाते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की आवाज उठाई। सुबह से ही पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों से चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर की ओर पहुंचना शुरू हो गए थे। किसानों के पहुंचने से क्षेत्र में काफी हलचल रही।
महापंचायत के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार के साथ बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। किसानों का कहना था कि बार-बार आश्वासन देने के बजाय सरकार को उनकी मांगों पर फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
महापंचायत में किसानों ने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे हैं और जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
महापंचायत को देखते हुए चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के भी इंतजाम किए गए। पुलिस ने यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग की। किसानों की भीड़ के कारण कुछ मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। किसान देर तक अपनी मांगों को लेकर डटे रहे।
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