सीआईआई समिट में गौतम अदाणी का बड़ा विजन, ऊर्जा और AI पर रखी बात

भारत की ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल आत्मनिर्भरता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को लेकर सीआईआई समिट में उद्योगपति गौतम अदाणी ने व्यापक विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में किसी भी देश की असली शक्ति उसकी सैन्य या आर्थिक क्षमता नहीं, बल्कि ऊर्जा और तकनीकी आत्मनिर्भरता से तय होगी।
पश्चिम एशिया संघर्ष पर टिप्पणी
अदाणी ने हालिया पश्चिम एशिया तनाव और महत्वपूर्ण ढांचागत सुविधाओं पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि अब ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा अलग-अलग मुद्दे नहीं रहे। दोनों मिलकर राष्ट्रीय शक्ति का नया आधार बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि जो देश अपनी ऊर्जा व्यवस्था पर नियंत्रण रखेगा, वही औद्योगिक विकास की दिशा तय करेगा, जबकि जो देश कंप्यूटिंग और एआई क्षमता में आगे होगा, वही भविष्य की तकनीकी दुनिया का नेतृत्व करेगा।
वैश्विक शक्ति संतुलन पर नजरिया
उन्होंने अमेरिका और चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों देश अलग राजनीतिक व्यवस्था के बावजूद ऊर्जा और तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। अदाणी ने कहा कि 1947 में भारत को राजनीतिक आजादी मिली थी, लेकिन असली स्वतंत्रता तब होगी जब देश अपनी ऊर्जा और तकनीकी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहेगा।
भारत के विकास मॉडल पर विचार
भारत के विकास मॉडल पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत का रास्ता अमेरिका या चीन जैसा नहीं होगा। देश की सबसे बड़ी ताकत इसकी बढ़ती घरेलू मांग, मध्यम वर्ग का विस्तार, शहरीकरण और तेजी से विकसित हो रहा औद्योगिक ढांचा है। उन्होंने कहा कि भारत में हर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए पहले से ही मांग मौजूद है, इसलिए अब चुनौती क्षमता निर्माण को तेजी से बढ़ाने की है।
ऊर्जा क्षेत्र में प्रगति
अदाणी ने बताया कि भारत ने मार्च 2026 तक 500 गीगावॉट स्थापित बिजली क्षमता का लक्ष्य पार कर लिया है, जिसमें पिछले 10 वर्षों में 53 प्रतिशत क्षमता जोड़ी गई है। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक अपनी ऊर्जा क्षमता को चार गुना बढ़ाकर 2000 गीगावॉट तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
एआई और रोजगार पर दृष्टिकोण
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर उन्होंने कहा कि इसे नौकरी खत्म करने वाली तकनीक के रूप में नहीं बल्कि अवसर पैदा करने वाले साधन के रूप में देखना चाहिए। एआई उत्पादकता बढ़ाने, नए रोजगार सृजित करने और छोटे कारोबारों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।
उन्होंने कहा कि एआई के लिए केवल डिजिटल सिस्टम ही नहीं, बल्कि मजबूत भौतिक ढांचे की भी जरूरत होती है—जैसे डेटा सेंटर और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति। इसी दिशा में गुजरात के खेड़ा में 30 गीगावॉट क्षमता वाला दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा है, जिसका बड़ा हिस्सा पहले ही चालू हो चुका है।
बड़े निवेश की प्रतिबद्धता
अदाणी समूह ने ऊर्जा परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इसे वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े क्लीन एनर्जी निवेशों में से एक माना जा रहा है।
उनका यह बयान भारत की ऊर्जा नीति, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई आधारित भविष्य की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया ऊर्जा संकट और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजर रही है।
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