NHAI पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर, हर 100 किलोमीटर पर बनेगा ‘पशु आश्रय स्थल’

HIGHLIGHTS
- NHAI और हाईवे एजेंसियां पशुओं वाले हॉटस्पॉट की पहचान करेंगी।
- चिन्हित स्थानों को पीएम गति-शक्ति प्लेटफार्म पर दर्ज किया जाएगा।
- पशुओं को सुरक्षित आश्रय स्थल तक पहुंचाने का खर्च एजेंसियां उठाएंगी।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं की मौजूदगी से होने वाली दुर्घटनाओं की समस्या देश के कई राज्यों में बनी हुई है। इन हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान में दिए गए आदेश के अनुपालन में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार की है। इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्गों से बेसहारा पशुओं को सुरक्षित हटाने, उन्हें आश्रय स्थल तक पहुंचाने और उनके पालन की जिम्मेदारी तय की गई है।
हाईवे के संचालन से जुड़ी एजेंसियों को इन पशुओं को सुरक्षित तरीके से हाईवे से हटाने का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं राज्य सरकार और जिला प्रशासन को प्रत्येक 100 किलोमीटर के दायरे में आश्रय स्थल, पशु बाड़ा या गौशाला स्थापित करने और उसका संचालन करने की जिम्मेदारी दी गई है। संवेदनशील हिस्सों में यह व्यवस्था 50 किलोमीटर के दायरे में करनी होगी।
राष्ट्रीय राजमार्गों से बेसहारा पशुओं को हटाने की तैयारी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से राज्यों को भेजी गई एसओपी के मुताबिक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) या नेशनल हाईवे के संचालन और रखरखाव से जुड़ी एजेंसी नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर उन जगहों की पहचान करेगी, जहां बेसहारा पशुओं की संख्या अधिक रहती है। इन स्थानों को पीएम गति-शक्ति प्लेटफार्म पर भी चिह्नित किया जाएगा।
हाईवे से बेसहारा पशुओं को सुरक्षित हटाकर आश्रय स्थल, पशु बाड़ा या गौशाला तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसियों की होगी। इसके लिए होने वाला परिवहन खर्च भी इन्हीं एजेंसियों को उठाना होगा। दूसरी ओर, राज्य सरकारों के माध्यम से जिला प्रशासन, स्थानीय निकाय या संबंधित विभाग हर 100 किलोमीटर पर एक आश्रय स्थल या गौशाला की पहचान करेंगे या उसे स्थापित करेंगे।
हाईवे एजेंसियों और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी तय
आश्रय स्थलों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य या जिला प्रशासन की होगी। जिन इलाकों में बेसहारा पशुओं की संख्या अधिक है, वहां 50 किलोमीटर के दायरे में आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। पशुओं के परिवहन की व्यवस्था राज्य सरकारों को करनी होगी।
नेशनल हाईवे की व्यवस्था के तहत जिन पशुओं को आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जाएगा, उनके परिवहन का भाड़ा प्रति पशु के हिसाब से राज्य तय करेंगे। इसका भुगतान एनएच से संबंधित एजेंसी द्वारा किया जाएगा।
समन्वय और निगरानी की भी होगी व्यवस्था
- रूट पेट्रोल वाहन या उपलब्ध होने पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए ऐसे क्षेत्रों की 24 घंटे निगरानी की जाएगी। पशु दिखाई देने पर उसकी जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) लोकेशन सहित सूचना तुरंत नोडल अधिकारी को दी जाएगी।
- फील्ड अधिकारी हाईवे के अलग-अलग खंडों में स्थान, समय और पशु के प्रकार समेत हाटस्पाट की मैपिंग करेंगे। इन जगहों पर सीसीटीवी कैमरे, बैरियर, प्रकाश व्यवस्था, साइनेज और तार फेंसिंग जैसे सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। हर छह महीने में इन हाटस्पाट की समीक्षा होगी।
- एनएच एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन और जिला हाईवे सुरक्षा टास्क फोर्स के बीच हर महीने समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।
- राज्यों को स्टेट लेवल नोडल अथॉरिटी गठित करनी होगी। यह अथॉरिटी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और एनएचएआइ के साथ नीतिगत समन्वय करेगी।
- राज्यों को आश्रय स्थलों का रिकॉर्ड रखना होगा। साथ ही पशुओं के मालिकों का पता लगाकर राज्य में लागू कानून के अनुसार उन पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई करनी होगी।
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