TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर विवाद, ऋतब्रत गुट ने चुनाव आयोग के सामने रखा पक्ष

HIGHLIGHTS
- ऋतब्रत गुट के प्रतिनिधिमंडल में पांच सदस्य शामिल रहे।
- ममता बनर्जी गुट की ओर से कल्याण बनर्जी पक्ष रखेंगे।
- नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होंगे।
तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर पार्टी के दो गुटों के बीच चल रहा विवाद अब अहम चरण में पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट गुरुवार को चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखने पहुंचा। आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग समय पर सुनवाई के लिए बुलाया है। ऋतब्रत गुट आयोग के सामने अपनी दलीलें रख चुका है।
चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद क्या बोले ऋतब्रत?
चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनके गुट ने आयोग के सामने अपनी दलीलें रखीं और रेजीनगर व नंदीग्राम में होने वाले उपचुनावों से जुड़े सवालों के जवाब दिए।
उन्होंने बताया कि इन उपचुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख बुधवार थी और गुरुवार को स्क्रूटनी हुई। ऐसे में चुनाव चिह्न आवंटन का मामला अभी अटका हुआ है। ऋतब्रत गुट ने फॉर्म ए और बी जमा कर दिए हैं। हालांकि, यही फॉर्म कालीघाट से भी जमा किए गए हैं। इसलिए अब चुनाव आयोग को अंतिम फैसला लेना है।
ऋतब्रत ने कहा कि उनका गुट तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहा है और फॉर्म ए भी जमा कर दिया गया है। अब प्रतिक्रिया चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर के पास है। उन्होंने कहा कि संभव है कि आयोग से सलाह लेने के बाद इस पर फैसला लिया जाए। उनके मुताबिक चुनाव आयोग सबसे बड़ी संस्था है और उस पर भरोसा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे संसदीय लोकतंत्र में काम करते हैं, इसलिए चुनाव आयोग पर भरोसा रखना होगा।
ऋतब्रत गुट के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में उनके अलावा अरूप राय, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अखरुज्जमान और वकील अमन झा शामिल हैं।
ऋतब्रत ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से मांगी गई जानकारी और सुनवाई की तारीखों को लेकर पहले कुछ गलतफहमी हुई थी। उनके अनुसार, 16 सितंबर को पहले से कोई बैठक तय नहीं थी। उन्होंने बताया कि आयोग के निर्देश के मुताबिक 16 सितंबर को अंतिम दस्तावेज जमा किए गए थे।
ममता बनर्जी गुट की ओर से कौन रखेगा पक्ष?
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से कल्याण बनर्जी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। वह लोकसभा सदस्य होने के साथ-साथ वकील भी हैं। इस गुट के अन्य चार प्रतिनिधियों के नाम फिलहाल स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
दोनों गुट खुद को असली टीएमसी और पार्टी के वैध प्रतिनिधि के तौर पर पेश कर रहे हैं।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
विधानसभा चुनाव में भाजपा से हार के बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के करीब 80 नवनिर्वाचित विधायकों में से लगभग 60 विधायक ममता बनर्जी से अलग हो गए। इसके बाद पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों की ओर से दावे सामने आए। दोनों पक्षों ने चुनाव आयोग से मान्यता की मांग की है।
इसी विवाद के बीच नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं। इन सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर को होगा, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को की जाएगी। ऐसे में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग का फैसला दोनों गुटों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
चुनाव आयोग के फैसले के बाद क्या हो सकता है?
चुनाव आयोग के फैसले के बाद भी इस विवाद के पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं है। एक राजनीतिक पर्यवेक्षक के हवाले से कहा गया है कि अगर किसी गुट को फैसला अपने खिलाफ लगता है तो वह सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है।
संभावनाओं में किसी एक गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न देना, फिलहाल मौजूदा स्थिति बरकरार रखना या नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करना शामिल बताया गया है।
अगर पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज किया जाता है तो दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न अपनाना पड़ सकता है। इस विवाद के बीच गुरुवार को हुई चुनाव आयोग की सुनवाई पर दोनों पक्षों की नजर बनी हुई है।
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