एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता असीम मंडल गिरफ्तार, कोलकाता STF ने पोटाशपुर से दबोचा

HIGHLIGHTS
- गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से दो बैग बरामद हुए।
- बैग से माओवादी साहित्य, प्रचार पुस्तिकाएं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले।
- पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले उसके पास करीब डेढ़ लाख रुपये नकद थे।
कोलकाता। झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में करीब चार दशकों से माओवादी गतिविधियां संचालित कर रहे भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर उर्फ मनोज को कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने गिरफ्तार किया है।
असीम मंडल पर राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उसकी गिरफ्तारी पूर्व मेदिनीपुर जिले के पोटाशपुर इलाके से हुई। कार्रवाई के दौरान उसके पास से दो बैग बरामद किए गए, जिनमें माओवादी साहित्य, प्रचार पुस्तिकाएं और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं।
पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के फुलचक गांव निवासी 64 वर्षीय असीम मंडल छात्र जीवन के दौरान ही कट्टर वामपंथी विचारधारा के संपर्क में आया था। इसके बाद वह पीपुल्स वार ग्रुप (PWG) में शामिल हो गया।
असीम मंडल ने पश्चिम बंगाल के सारेंगा और गोआलतोड़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्य झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुराबंदा क्षेत्र में संगठन की जड़ों को मजबूत करने के लिए लंबे समय तक काम किया।
21 सितंबर 2004 को भाकपा (माओवादी) के औपचारिक गठन के बाद असीम मंडल एक बार फिर जंगलमहल क्षेत्र में लौट आया। यहां उसने स्थानीय आंदोलनों को हिंसक मोड़ देने में सक्रिय भूमिका निभाई।
लालगढ़ आंदोलन में भी रही अहम भूमिका
मशहूर लालगढ़ आंदोलन में भी असीम मंडल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर्ष 2010 में संगठन ने उसे पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी के सचिव की जिम्मेदारी सौंपी थी।
इसके अलावा वह बंगाल-झारखंड-ओडिशा (BJO) क्षेत्रीय कमेटी में भी महत्वपूर्ण पदों पर रहा।
वर्ष 2011 में शीर्ष माओवादी नेता किशनजी के मारे जाने के बाद असीम मंडल जंगलमहल से हटकर झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम स्थित सारंडा के घने जंगलों में चला गया। इसके बाद वह वहीं से अपनी गतिविधियां संचालित करने लगा।
हाल के दिनों में संगठन के कई बड़े कैडरों के आत्मसमर्पण के बाद असीम मंडल लगातार सुरक्षा बलों की निगरानी में था। इसी वर्ष अगस्त में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से पूछताछ में पता चला था कि असीम मंडल मुख्यधारा में लौटने को तैयार नहीं है। साथ ही, परिस्थितियां अनुकूल होने पर उसके दोबारा जंगलमहल में पैर जमाने की कोशिश करने की बात सामने आई थी।
जंगल में एके-47 और दस्तावेज छोड़कर निकला था
बढ़ती उम्र और गिरते स्वास्थ्य के चलते असीम मंडल ने 13-14 अगस्त के आसपास जंगल में अपनी एके-47 राइफल और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज छोड़ दिए थे। इसके बाद वह कार से सुरक्षित ठिकाने की ओर निकल गया था।
माना जा रहा है कि उसका अंगरक्षक मंगल और पत्नी मालती अभी भी जंगलों में छिपे हुए हैं। पुलिस की जांच के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले असीम मंडल के पास करीब डेढ़ लाख रुपये नकद थे।
पुलिस के मुताबिक, वह अपने परिचितों और रिश्तेदारों के ठिकानों पर भेष बदलकर रह रहा था। आखिरकार, जब वह आगे की यात्रा के खर्च के लिए एक परिचित से पैसे लेने पोटाशपुर पहुंचा, तभी पहले से मुस्तैद कोलकाता STF ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
पत्नी भी माओवादी कैडर रह चुकी है
असीम मंडल की पत्नी भी पूर्व मेदिनीपुर जिले के पोटाशपुर की रहने वाली है और माओवादी कैडर के तौर पर सक्रिय रही है। उसे वर्ष 2010 में ही STF ने गिरफ्तार कर लिया था।
वह वर्तमान में जेल में बंद है। असीम मंडल की गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में सुरक्षा बलों की एक बड़ी और निर्णायक सफलता माना जा रहा है।
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