केंद्र का बड़ा फैसला, आंध्र प्रदेश-कर्नाटक कॉरिडोर के लिए 4294 करोड़ रुपये मंजूर

HIGHLIGHTS
- केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश-कर्नाटक आर्थिक गलियारे के लिए 4,294 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी।
- बल्लारी-गुंटकल के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन समेत दो प्रमुख परियोजनाओं पर होगा काम।
- परियोजना से माल ढुलाई, उद्योग, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा।
केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बीच आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर कुल 4,294 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट के इस फैसले से दोनों राज्यों में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
इस योजना के तहत दो प्रमुख परियोजनाओं को शामिल किया गया है। इनमें पहली परियोजना बल्लारी-गुंटकल के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन का निर्माण है, जिसके लिए 1,264 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। दूसरी परियोजना भव्य रसायन योजना है, जिसके लिए 3,030 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। यह योजना क्षेत्र में उद्योगों के विस्तार में सहायक होगी।
स्टील और सीमेंट उद्योगों को मिलेगा लाभ
यह आर्थिक गलियारा बल्लारी-होसपेट क्षेत्र के स्टील और सीमेंट क्लस्टरों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भारी उद्योगों के कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही आसान और तेज होगी। इसके अलावा प्रमुख समुद्री बंदरगाहों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होगी।
रेलवे लाइन के विस्तार से हर साल 1.6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने की संभावना है, जिससे व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
परियोजना की प्रमुख बातें
- कुल निवेश: आंध्र-कर्नाटक आर्थिक गलियारे के लिए 4,294 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
- रेलवे विस्तार: बल्लारी-गुंटकल मार्ग पर तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के निर्माण पर 1,264 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
- भव्य रसायन योजना: औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने वाली इस योजना के लिए 3,030 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
- रोजगार सृजन: परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान करीब 31 लाख मानव-दिवस रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
- माल ढुलाई क्षमता: गलियारे के जरिए हर साल 1.6 करोड़ टन अतिरिक्त माल की आवाजाही संभव हो सकेगी।
पर्यावरण को भी मिलेगा फायदा
इस परियोजना से आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलने की उम्मीद है। गलियारे के शुरू होने के बाद हर साल करीब 6.67 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है, जो लगभग 27 लाख पेड़ लगाने के बराबर है।
इसके अलावा, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण हर साल करीब 149 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक लागत बचाने में मदद मिलेगी। माल ढुलाई खर्च कम होने से स्थानीय उद्योगों के उत्पादों की बाजार में प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ने की संभावना है।
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