अजमेर मेयर चुनाव में किरण गढ़वाल का नामांकन बरकरार, भाजपा की आपत्ति खारिज

HIGHLIGHTS
- नामांकन जांच के दौरान भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराई थी।
- भाजपा ने नगर निगम के बकाया भुगतान का हवाला दिया था।
- सुनवाई में दोनों पक्षों ने अपने तर्क और दस्तावेज पेश किए।
अजमेर नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर गुरुवार को चल रहा सियासी घमासान भाजपा की आपत्ति खारिज होने के साथ खत्म हो गया। मेयर पद के लिए कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल के नामांकन पर भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा की ओर से दर्ज कराई गई आपत्ति को प्रशासन ने खारिज कर दिया। इसके साथ ही किरण गढ़वाल का नामांकन वैध माना गया है और वह मेयर पद के चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी बनी रहेंगी।
नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भाजपा ने किरण गढ़वाल के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप था कि गढ़वाल पैलेस पर वर्ष 2018 से नगर निगम की 19 लाख 18 हजार 628 रुपये की बकाया राशि है और नामांकन में इससे संबंधित जानकारी स्पष्ट नहीं की गई। भाजपा ने नगर निगम अधिनियम की धारा 24 का हवाला देते हुए यह आपत्ति दर्ज कराई थी।
गुरुवार को संबंधित अधिकारियों के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क और दस्तावेज प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान भाजपा और कांग्रेस समर्थक आमने-सामने आ गए और नारेबाजी हुई, जिससे कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया। सुरक्षा को देखते हुए मौके पर पुलिस बल भी तैनात रहा।
NOC को लेकर कांग्रेस ने रखा अपना पक्ष
फैसला आने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल के पति दिलीप गढ़वाल ने कहा कि नगर निगम की ओर से एनओसी जारी की गई है। उन्होंने बताया कि एनओसी जारी होने से पहले निगम के निर्देश पर 24 हजार और 27 हजार रुपये की राशि जमा कराई गई थी।
दिलीप गढ़वाल ने भाजपा की आपत्ति को गलत बताते हुए कहा कि जिस बकाया राशि का उल्लेख किया जा रहा है, उसे लेकर स्टे चल रहा है। उन्होंने कहा कि आपत्ति के बावजूद प्रशासन ने कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज नहीं किया और नामांकन वैध रहा।
कांग्रेस के लीगल एडवाइजर ने भी दी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के लीगल एडवाइजर एडवोकेट विवेक पाराशर ने कहा कि भाजपा की ओर से आपत्ति दर्ज कर कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन रद्द कराने का प्रयास किया गया था, लेकिन प्रशासन ने इसे खारिज कर दिया।
पाराशर ने आरोप लगाया कि भाजपा में बौखलाहट नजर आ रही है और जनता इसे समझ रही है। उन्होंने भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि आपत्ति समेत अन्य प्रयास किए गए, लेकिन अंत में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन बरकरार रहा। ये आरोप कांग्रेस के लीगल एडवाइजर के बयान हैं।
80 वार्डों में कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 पार्षद
नामांकन पर फैसला आने के बाद अजमेर नगर निगम के मेयर चुनाव का मुकाबला आगे बढ़ गया है। निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस के 37, भाजपा के 32 और निर्दलीय 11 वार्डों में विजयी हुए हैं। ऐसे में मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।
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