‘वकील ही बन जाते हैं विशेषज्ञ’: दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण पर एससी की टिप्पणी

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के बढ़ते संकट पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान स्कूलों को बंद करने और निर्माण श्रमिकों के भत्ते के भुगतान से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए गए।
सुनवाई में वकील मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी कि जब भी प्रदूषण के कारण स्कूल बंद किए जाते हैं, गरीब बच्चों को सबसे अधिक नुकसान होता है, क्योंकि वे मिड-डे मील जैसी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि इस मामले में निर्णय विशेषज्ञों के विवेक पर छोड़ देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल स्कूलों की छुट्टियों को जारी रखने का निर्देश दिया और साथ ही उम्मीद जताई कि छुट्टियों के समाप्त होने तक प्रदूषण कम हो जाएगा।
सुनवाई के दौरान मजदूर संगठनों की ओर से पेश वकील ने भी भत्तों के भुगतान और श्रमिकों की समस्याओं पर चर्चा की। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि प्रतिबंधों के कारण बेकार बैठे निर्माण श्रमिकों का सत्यापन कर उनके खातों में राशि हस्तांतरित की जाए। साथ ही, अदालत ने सरकार से वैकल्पिक काम उपलब्ध कराने पर विचार करने को कहा। दिल्ली सरकार ने जानकारी दी कि 2.5 लाख निर्माण श्रमिकों में से 7,000 का सत्यापन हो चुका है और उनके खातों में राशि हस्तांतरित कर दी गई है।
सीजेआई ने स्पष्ट किया कि श्रमिकों के खातों में भेजी गई राशि सुरक्षित रहनी चाहिए और किसी अन्य खाते में न चली जाए। सुनवाई में दिल्ली के कई टोल प्लाजा पर जाम और उससे होने वाले प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को जनवरी तक टोल प्लाजा हटाने के निर्देश क्यों नहीं दिए जाते। सीजेआई ने कहा कि वर्तमान में धन की लालच में टोल प्लाजा बनाए जा रहे हैं।
अदालत ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के नौ टोल प्लाजा कुछ समय के लिए बंद करने पर विचार किया जाए और इस पर निर्णय लेने के लिए एक सप्ताह की समयसीमा तय की गई है।
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