मणिशंकर अय्यर का मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमला, बोले- अब तक के सबसे खराब चुनाव आयुक्त

HIGHLIGHTS
- अय्यर ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपने लिखे 14-15 नोटों का सार्वजनिक समर्थन नहीं किया।
- उन्होंने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बताया।
- अय्यर ने संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर अपनी राय रखी।
पाकिस्तान और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने अब मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर भी टिप्पणी की है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार शर्मनाक लगा। इस दौरान अय्यर ने दोनों चुनाव आयुक्तों पर भी निशाना साधा।
मणिशंकर अय्यर का कहना है कि दोनों चुनाव आयुक्तों का व्यवहार भी ठीक नहीं रहा, क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर उन 14-15 नोटों का समर्थन नहीं किया, जिन्हें उन्होंने लिखा था। उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्हें लगता है कि ये अब तक के सबसे खराब चुनाव आयुक्त रहे हैं।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर क्या बोले अय्यर?
मणिशंकर अय्यर ने कहा कि उन्हें लगता है कि हाल तक चुनाव आयोग पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम कर रहा था। उनके मुताबिक, किसी संवैधानिक संस्था को कानूनी तौर पर स्वतंत्र बनाने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को स्वतंत्र नहीं कहा जाता, बल्कि वह एक संवैधानिक संस्था है। इसलिए किसी संस्था को संवैधानिक संस्था बनाकर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि वह स्वतंत्र होगी। हालांकि, अय्यर ने कहा कि इसके बाद इसमें गड़बड़ी की गई है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव आयुक्तों और जजों की नियुक्ति का तरीका बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है।
भारत की कूटनीति पर भी उठाए सवाल
मणिशंकर अय्यर ने भारत की कूटनीति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हमें पाखंडी माना जा रहा है, क्योंकि हम दुनिया से कहते हैं कि यह युद्ध का दौर नहीं है और फिर पाकिस्तान के साथ युद्ध करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत बातचीत और कूटनीति की बात करता है, लेकिन पाकिस्तान ही एकमात्र ऐसा देश है जिसके साथ भारत की कोई कूटनीति या बातचीत नहीं है। अय्यर ने कहा कि भारत ने 'क्वाड' में शामिल होकर चीन को भी नाराज कर दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि अब अमेरिका भी कह रहा है कि 'क्वाड' का कोई महत्व नहीं है। अय्यर ने सवाल किया कि यह किस तरह की कूटनीति है और इसका भारत की रणनीतिक स्वायत्तता से कोई लेना-देना नहीं है।
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