गोमती का जलस्तर बढ़ने से लखनऊ में बाढ़, कई इलाकों में घरों में घुसा पानी

HIGHLIGHTS
- अगले 24 घंटे में गोमती का जलस्तर दो फीट तक बढ़ने की आशंका है।
- प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में 10 नावों की सुविधा शुरू की।
- एक हजार से अधिक बीघा फसल और सब्जियों के नुकसान का सर्वे होगा।
गोमती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण रविवार को दुबग्गा के जेहटा रोड सहित आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। शाम छह बजे तक जेहटा-माल रोड पर करीब डेढ़ फीट पानी बह रहा था। माल और इटौंजा के ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति लगातार बिगड़ रही है। प्रशासन के अनुसार, अगले 24 घंटे में गोमती का जलस्तर दो फीट तक और बढ़ सकता है।
प्रशासन की टीम ने हयात नगर मोड़, दौलतखेड़ा, सैथा और बरावन कला सहित प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। टीम ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। पहली मंजिल पर रहने वाले लोगों को दूसरी मंजिल पर जाने और गर्भवती महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए कहा गया। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 10 नावें भी उपलब्ध कराई गई हैं।
1000 बीघा फसल के नुकसान का होगा सर्वे
ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि बाढ़ के कारण धान, सब्जियों और अन्य फसलों को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है। डीएम ने एक हजार से अधिक बीघा में फसल और सब्जियों को हुए नुकसान का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। किसानों को नियमानुसार सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया।
हयात नगर मोड़, दौलतखेड़ा और सैथा का निरीक्षण करने के बाद डीएम का काफिला गुलमीखेड़ा, टाड़खेड़ा और सुखलालखेड़ा की तरफ बढ़ा, लेकिन रास्ते में ज्यादा जलभराव होने के कारण वापस लौटना पड़ा। इसे लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली। सुरक्षा व्यवस्था के तहत रात में पेट्रोलिंग बढ़ाने और दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
मंझौवा में 500 बीघा धान की फसल डूबी
मंझौवा गांव में गोमती का पानी बढ़ने से करीब 500 बीघा में खड़ी धान की पकी फसल पानी में डूब गई। खीरा, लौकी और भिंडी की फसल भी प्रभावित हुई है। अजय की तीन बीघा खीरे की फसल डूब गई। इसके अलावा जयकरन, इंद्रपाल, राजाराम, महेश और सरवन के घर भी बारिश के कारण गिर गए।
घर में घुसा पानी, किराये के कमरे में रहने को मजबूर परिवार
फैजुल्लागंज के नंदन चौराहे पर रहने वाली सीमा जायसवाल रविवार को हाथों में बैग लेकर तीन फीट पानी से गुजरकर सड़क तक पहुंचीं। वह पांच दिन से पानी कम होने का इंतजार कर रही थीं, लेकिन मुश्किलें बढ़ती गईं और रविवार को उन्हें घर छोड़ने का फैसला करना पड़ा। अब वह पति और बच्चों के साथ किराये के कमरे में रहेंगी। लगातार बढ़ती परेशानियों के बीच कई परिवार घर छोड़कर दूसरी जगह चले गए हैं। किसी ने 3500 तो किसी ने तीन हजार रुपये में कमरा किराये पर लिया है।
अटल चौक के पास रहने वाले मोहम्मद शमीर की गली में तीन दिन से पानी भरा हुआ था। रविवार को पानी घर के अंदर पहुंचने के बाद उनका परिवार बेघर हो गया। शमीर ने त्रिवेणीनगर में 3500 रुपये में कमरा किराये पर लिया है। छह लोगों का परिवार अब एक ही कमरे में रहेगा। सिलिंडर और दूसरा सामान लेकर पानी से बाहर निकल रहे शुभम भी किराये के कमरे में जाने के लिए निकले थे। सुंदरलाल भी तीन दिन से पानी घटने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन जलस्तर कम होने के बजाय और बढ़ गया। इसके बाद उन्हें भी दूसरी जगह जाना पड़ा। गणेश विहार कॉलोनी में मनोज के घर में भी कई दिनों से पानी भरा हुआ है।
हर तरफ पानी, लेकिन पेयजल की परेशानी
फैजुल्लागंज के मामा चौराहा, अटल चौक, गणेश विहार, नंदन चौराहा और अन्य कॉलोनियों में चारों तरफ पानी दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद घरों में फंसे लोगों को पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। घर के नलों से बदबूदार पानी आ रहा है। सीमा ने बताया कि इस पानी से पीना तो दूर हाथ-मुंह तक नहीं धोया जा सकता। प्रदीप के अनुसार, पीने के पानी का वितरण किया जा रहा है, लेकिन उनके घर तक पानी नहीं पहुंचा। कई लोग जुगाड़ से बनाई गई नावों के जरिए नगर निगम के टैंकर से बाल्टियों में पानी भरकर ले जाते दिखाई दिए।
बच्चे को गोद में लेकर मदद के लिए भटकती रही मां
कई दिनों से पानी में फंसी ममता और उनके पति आशीष रविवार को घर से कुछ जरूरी सामान निकालकर कंट्रोल रूम के पास पहुंचे। उनके साथ गोद में एक साल का बच्चा भी था। करीब दो घंटे तक इंतजार करने के बाद भी नाव या ट्रैक्टर नहीं मिला। बच्चे की हालत खराब होने पर ममता पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मदद की गुहार लगाती रहीं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिला।
अंतिम संस्कार की राह भी हुई मुश्किल, गुलाला घाट में डेढ़ फीट तक पानी
गोमती की बाढ़ ने अंतिम सफर की राह भी मुश्किल कर दी है। गुलाला घाट के अंत्येष्टि स्थल में तीन दिन से नदी का पानी भरा है। रविवार को घाट तक जाने वाली सड़क पर करीब डेढ़ फीट पानी तेज बहाव के साथ बह रहा था।
दोपहर करीब एक बजे एक शव वाहन घाट पहुंचा। चालक ने लोगों से पानी की स्थिति की जानकारी ली और इसके बाद वाहन को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। बाद में शव को वाहन से उतारकर परिजन पानी से गुजरते हुए चबूतरे तक पहुंचे। अंत्येष्टि स्थल के परिसर में भी करीब एक फीट पानी भरा है, जो लकड़ियों तक पहुंच चुका है। घाट की व्यवस्था देखने वाले वीरेंद्र पांडे ने बताया कि पानी भरने के कारण बिजली आपूर्ति बंद है। इसके चलते विद्युत शवदाह गृह भी बंद है।
सिलिंडर लेने के लिए पानी के बीच से जाना पड़ा
घाट जाने वाले रास्ते पर गैस सिलिंडर वितरण केंद्र तक पहुंचने के लिए लोगों को डेढ़ से दो फीट पानी पार करना पड़ा। खदरा निवासी सुहैल और ऐशबाग निवासी मोहम्मद जैब ने बताया कि मजबूरी में करीब 300 मीटर तक पानी के बीच से गुजरकर सिलिंडर लेना पड़ा।
प्रेरणा स्थल में भी जमा है पानी
गोमती का पानी प्रेरणा स्थल में अब भी भरा हुआ है। कार्यालय में पानी जाने से रोकने के लिए गेट पर रेत की बोरियां लगाई गई हैं। रविवार को यहां पहुंचे लोगों को भी वापस लौटना पड़ा। आईआईएम मार्ग से कैरियर कॉलेज के पास फैजुल्लागंज जाने वाली सड़क पर करीब 100 मीटर तक तेज बहाव बना हुआ है।
गोमती का जलस्तर लगातार बढ़ा, मिल्लतनगर में चार दिन से घरों में कैद लोग
फैजुल्लागंज में गोमती का जलस्तर लगातार बढ़ने के साथ बाढ़ का पानी ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया है। घैला, अल्लू नगर दिगुरिया, दाउदनगर सहित कई क्षेत्रों में पानी तेजी से बढ़ रहा है। मिल्लत नगर की कच्ची ढाल में चार से पांच फीट तक पानी भर गया है। यहां रहने वाली विमला चार दिन से बेटे के साथ घर में कैद हैं।
विमला ने बताया कि घर में पीने के पानी और खाने का सामान नहीं है। आसपास कई लोग बीमार हैं और उन्हें दवाओं की जरूरत है। उनका आरोप है कि इलाके में न तो नाव चल रही है और न ही जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
मामा कॉलोनी की रहने वाली मुन्नी देवी जलभराव के बाद अपने भाई के घर दाउदनगर पहुंची थीं। वहां भी पानी बढ़ने पर उन्हें भाभी सरला के साथ घर छोड़ना पड़ा। सरला ने बताया कि बढ़ता जलस्तर देखकर उनकी तबीयत बिगड़ गई।
मंत्री ने प्रभावित लोगों को बांटी राहत सामग्री
जल शक्ति एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने प्रभावित बस्तियों का निरीक्षण किया। उन्होंने लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और राहत सामग्री भी वितरित की। फैजुल्लागंज के कैलाश विहार, दाउदनगर के पास और मुरदैय्या में जलभराव के बीच रविवार को सपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता पूजा शुक्ला नाव से पहुंचीं। उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात की और राहत सामग्री बांटी।
नगर निगम की कार्रवाई से लोगों में नाराजगी
फैजुल्लागंज में घर छोड़कर अस्थायी ठिकानों पर रह रहे लोगों के खिलाफ नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई से नाराजगी है। दाउदनगर निवासी ई-रिक्शा चालक सकटू ने पत्नी मनोरमा और दो बेटियों के साथ 60 फीट बंधे के किनारे नाले पर अस्थायी झोपड़ी बनाई थी। रविवार को नगर निगम जोन-3 की टीम ने झोपड़ी तोड़ दी और सामान बाहर निकाल दिया। वहीं, दुर्गापुरी निवासी अमित की लोहे की गुमटी भी नाले के दूसरी तरफ गिरा दी गई।
इटौंजा-माल रोड पर रविवार दोपहर करीब 12:30 बजे से शाम चार बजे तक बाढ़ प्रभावित लोगों ने सपा कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दी। इसी दौरान राशन बांटकर लौट रहे भाजपा विधायक योगेश शुक्ला के काफिले को प्रदर्शनकारियों ने हरदा चौराहे पर रोक लिया। प्रदर्शनकारियों ने गाड़ी के बोनट पर हाथ मारकर विरोध जताया।
इस दौरान भाजपा और सपा कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गाली-गलौज करने और विधायक व सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने का आरोप लगाया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और पीएसी ने दोनों पक्षों को अलग किया और विधायक की गाड़ी को जाम से बाहर निकलवाया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि अकड़रिया गांव के बाढ़ प्रभावित लोगों को राशन और अन्य सुविधाएं देने में प्रशासन भेदभाव कर रहा है। एसडीएम आकाश सिंह ने आधे घंटे में नाव और स्टीमर की मांग पूरी कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क से हट गए, हालांकि चौराहे पर डटे रहे।
इसी दौरान सपा सांसद आरके चौधरी, पूर्व विधायक गोमती यादव, राजेंद्र यादव, ऊषा सेन, राम सिंह राणा और अरुण कुमार सहित कई सपा नेता मौके पर पहुंच गए।
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