सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद छात्रों ने मांगी मदद, सबसे पहले पहुंची ब्लिंकइट एंबुलेंस

HIGHLIGHTS
- लगभग 10 मिनट बाद 1:50 बजे टीम घटनास्थल पर पहुंच गई।
- स्थानीय लोगों ने भी कंक्रीट के स्लैब हटाने में मदद की।
- इमारत में करीब 15 कमरे थे, जिनमें दो से तीन छात्र रहते थे।
नई दिल्ली। सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद मलबे में फंसे छात्रों ने मदद के लिए फोन किए। बचाव अभियान शुरू होने के दौरान ब्लिंकइट की एंबुलेंस सबसे पहले मौके पर पहुंची। आसपास के लोग भी राहत और बचाव कार्य में जुट गए और भारी कंक्रीट के स्लैब हटाकर मलबे में फंसे लोगों को तलाशने लगे।
फंसे छात्रों ने खुद बुलाई एंबुलेंस
हादसे के बाद मलबे में फंसे लोग अपने दोस्तों और परिचितों को फोन कर मदद मांग रहे थे। बचाव कार्य में शामिल लॉ स्टूडेंट अभिषेक के मुताबिक, अंदर फंसे छात्रों ने ही फोन करके ब्लिंकइट की एंबुलेंस बुलवाई थी।
उनके अनुसार, फायर ब्रिगेड, पुलिस और एनडीआरएफ के पहुंचने से पहले ही ब्लिंकइट की एंबुलेंस गली में पहुंच चुकी थी। ब्लिंकइट की कर्मचारी श्रुति ने बताया कि ऐप के जरिए पहली कॉल उनकी टीम को मिली थी। उनकी एंबुलेंस सफदरजंग अस्पताल में तैनात रहती है।
ब्लिंकइट की क्लस्टर मैनेजर अर्चना सुरमा के मुताबिक, हादसे के दौरान करीब 1:40 बजे पहली कॉल आई थी और लगभग 10 मिनट बाद, 1:50 बजे तक टीम घटनास्थल पर पहुंच गई थी। टीम ने राहत और बचाव कार्य में मदद की।
आसपास के लोग भी बचाव में जुटे
हादसे के बाद स्थानीय लोग भी राहत कार्य में शामिल हो गए। एक स्थानीय निवासी के मुताबिक, तत्काल कोई व्यवस्था नहीं होने पर लोगों ने खुद भारी कंक्रीट के स्लैब हटाने और मलबा साफ करने का काम शुरू किया, ताकि अंदर फंसे लोगों तक पहुंच बनाई जा सके।
मौके पर पहुंचे बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने बताया था कि अंदर फंसे लोगों के फोन भी आ रहे थे और बचाव दल उनसे लगातार संपर्क में थे। उन्होंने सभी लोगों के सुरक्षित होने की प्रार्थना की थी।
करीब 15 कमरों में रहते थे छात्र
दिल्ली पुलिस में काम करने वाले स्थानीय निवासी राजन छेत्री के मुताबिक, इस इमारत में करीब 15 कमरे थे। प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे।
उन्होंने बताया कि यहां रहने वाले ज्यादातर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से थे। ये छात्र मुख्य रूप से मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, छात्र प्रति बेड करीब 12,000 रुपये दे रहे थे।
बगल की इमारत को लेकर भी चिंता
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने बगल में मौजूद इमारत की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। लोगों का दावा था कि वह इमारत भी खतरे में नजर आ रही थी और थोड़ी झुकी हुई दिखाई दे रही थी।
स्थानीय निवासियों ने इलाके की पुरानी इमारतों की स्ट्रक्चरल जांच कराने की मांग की, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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