पेपर लीक के आरोपों के बीच MPSC की जांच होगी, फडणवीस ने राज्यपाल को भेजी सिफारिश

HIGHLIGHTS
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जांच कमेटी बनाने की सिफारिश की है।
- सिफारिश राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को भेजी गई है।
- जांच कमेटी की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज को देने का प्रस्ताव है।
महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी की परीक्षाएं आयोजित कराने वाले महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की कार्यप्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा कदम उठाया है। पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के आरोपों के बाद फडणवीस ने MPSC के पूर्व और मौजूदा अध्यक्षों व सदस्यों के कामकाज की जांच के लिए कमेटी गठित करने की सिफारिश की है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मंगलवार को अपनी यह सिफारिश राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को भेजी है।
रिटायर्ड हाईकोर्ट जज करेंगे कमेटी की अगुवाई
मुख्यमंत्री की सिफारिश के अनुसार, जांच कमेटी की अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज को सौंपी जानी चाहिए। कमेटी को अपनी जांच पूरी करके तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। इसके बाद रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत होगी जांच
यह सिफारिश संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत की गई है। यह अनुच्छेद लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने या निलंबित करने से संबंधित है।
सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि MPSC की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। अभ्यर्थी आयोग के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों की भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं।
पुणे में छह दिन से प्रदर्शन, अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग
MPSC अभ्यर्थियों का पुणे में प्रदर्शन लगातार छह दिनों से जारी है। इस आंदोलन को अलग-अलग वर्गों और राजनीतिक हलकों से भी समर्थन मिल रहा है।
प्रदर्शनकारियों की कई मांगें हैं। इनमें MPSC की परीक्षाओं के ऑब्जेक्टिव या डिस्क्रिप्टिव फॉर्मेट को तय करने की मांग भी शामिल है। हालांकि, आंदोलन की सबसे बड़ी मांग MPSC के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की है।
राहुल गांधी भी अभ्यर्थियों से कर सकते हैं मुलाकात
MPSC का मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 7 या 8 अक्टूबर को आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात करने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और जोर पकड़ सकता है।
MPSC के सचिव की प्रतिनियुक्ति भी खत्म कर चुकी है सरकार
विवाद के बीच महाराष्ट्र सरकार MPSC के सचिव महेंद्र उत्तमराव हरपालकर की प्रतिनियुक्ति भी समाप्त कर चुकी है। आयोग के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार के इस फैसले को भी एक अहम कदम माना जा रहा है।
30 सितंबर को सरकार ने किया था न्यायिक जांच का एलान
MPSC अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। इसके बाद 30 सितंबर को महाराष्ट्र सरकार ने कहा था कि MPSC के पूर्व और मौजूदा अध्यक्षों तथा सदस्यों के कामकाज की तीन महीने के भीतर न्यायिक जांच कराई जाएगी।
अभ्यर्थी इसी तरह की जांच की मांग कर रहे थे। सरकार ने कहा था कि यह जांच संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत कराई जाएगी।






















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